नगर पालिका द्वारा गौरव पथ में प्रस्तावित दुकानों की नीलामी प्रक्रिया पर उठे सवाल : भर्राशाही के आरोपों से गरमाया माहौल, रोक लगाने की मांग

नगर पालिका द्वारा गौरव पथ में प्रस्तावित दुकानों की नीलामी प्रक्रिया पर उठे सवाल : भर्राशाही के आरोपों से गरमाया माहौल, रोक लगाने की मांग

गरियाबंद : नगर पालिका परिषद गरियाबंद द्वारा गौरवपथ मार्ग में प्रस्तावित व्यवसायिक परिसर निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन को आवेदन सौंपकर नीलामी प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। आवेदकों का आरोप है कि पालिका प्रशासन द्वारा नियमों को दरकिनार करते हुये मनमाने ढंग से कार्य किया जा रहा है, जिससे जनहित प्रभावित हो रहा है।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार भूतेश्वरनाथ मंदिर मार्ग स्थित गांधी मैदान से लगे गौरवपथ पर प्रस्तावित व्यवसायिक परिसर के लिये न तो राजस्व विभाग और न ही रेरा से विधिवत अनुमति ली गई है, साथ ही स्थल पर पार्किंग, आम नागरिकों के बैठने की व्यवस्था और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी कोई प्रावधान सुनिश्चित नहीं किया गया है।

आवेदकों का आरोप है कि उक्त स्थल पर व्यवसायिक परिसर निर्माण के लिये भूमि आंबटन की प्रक्रिया ही पूरी नही की गई है और नीलामी शुरू कर दी गई।

आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि परिसर निर्माण के चलते गांधी मैदान की लगभग 5 से 10 फीट भूमि प्रभावित हो रही है, जिससे मैदान का स्वरूप बदलने और आकार छोटा होने की आशंका है। वर्षों से खेलकूद, सामाजिक, धार्मिक एवं वैवाहिक आयोजनों का केंद्र रहे इस मैदान के संरक्षण को लेकर नागरिकों में चिंता व्याप्त है।

नीलामी प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाये गये हैं। बताया गया कि 16 फरवरी की रात देर रात 2 बजे तक नीलामी संचालित की गई, अधिकृत बोलीदाताओं की सूची समय पूर्व सार्वजनिक नहीं की गई तथा आरक्षणवार दुकानों की अलग-अलग बोली भी नहीं कराई गई। इससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गये हैं।

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आवेदकों ने यह भी आरोप लगाया है कि आरक्षित दुकानों के लिये प्राप्त आवेदनों में आवश्यक अर्हता प्रमाण पत्र संलग्न नहीं थे और नगरपालिका द्वारा उनकी विधिवत जांच भी नहीं की गई। इतना ही नहीं, नीलामी स्थल पर ऐसे व्यक्तियों की उपस्थिति और बोली लगाये जाने की बात भी सामने आई है जो अधिकृत सूची में शामिल नहीं थे, जिससे निष्पक्षता पर संशय गहरा गया है।

व्यवसायिक परिसर की निर्माण अवधि, लागत और दुकानों के संभावित किराया निर्धारण को लेकर भी पालिका प्रशासन द्वारा कोई स्पष्ट जानकारी पूर्व में नहीं दी गई, जिससे भविष्य में आवेदकों को आर्थिक नुकसान की आशंका जताई जा रही है। इसके अतिरिक्त दुकानों के आवंटन में नगर पालिका क्षेत्र के बाहर के व्यक्तियों को प्राथमिकता दिये जाने का आरोप भी लगाया गया है, जिससे स्थानीय व्यापारियों में असंतोष बढ़ा है।

इन सभी बिंदुओं को लेकर नागरिकों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर नीलामी प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शहर में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है और नगरपालिका की कार्यप्रणाली पर भर्राशाही तथा मनमानी के आरोप खुलकर सामने आ रहे हैं।










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