फ़रवरी का महीना फूलगोभी की खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह समय फूलगोभी की खेती से किसानों को कम अवधि में बंपर मुनाफा कमाने का मौका देता है. हालांकि, फूलगोभी एक बेहद संवेदनशील फसल है, जिसमें प्रबंधन की छोटी सी चूक भी उत्पादन पर गहरा असर डाल सकती है. इन दिनों खेतों में ‘बटनिंग’ (Buttoning) की समस्या सबसे ज्यादा देखी जा रही है, जो किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. इस समस्या में फूल पूरी तरह विकसित होने के बजाय छोटे आकार बटन की तरह रह जाते हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता और वजन दोनों में भारी गिरावट आती है। चूंकि यह कम दिनों की फसल है, इसलिए इसमें सुधार की गुंजाइश बहुत कम होती है. ऐसे में, अच्छा उत्पादन और सही बाजार भाव पाने के लिए किसानों को फसल की निगरानी की जरूरत है.
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क्यों होती है फूलगोभी में बटनिंग की समस्या?
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार पाठक का कहना है कि फूलगोभी में बटनिंग की समस्या मुख्य रूप से पोषक तत्वों के असंतुलन और गलत कृषि प्रबंधन का नतीजा है. अक्सर किसान मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी या नमी के अभाव पर ध्यान नहीं देते, जिससे पौधे का विकास (Vegetative growth) रुक जाता है और वह समय से पहले ही छोटा फूल बना लेता है. किसान रोपाई के लिए हमेशा 20 से 25 दिन पुरानी स्वस्थ पौध का ही चयन करें, क्योंकि अधिक उम्र की पौध लगाने से बटनिंग का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा, खेत में नमी बनाए रखना और यूरिया व खाद का संतुलित प्रयोग करना जरूरी है.
कैसे करें बीमारी की रोकथाम
फूल गोभी की फसल से अच्छा उत्पादन लेने के लिए जरूरी है कि किसान 20 से 25 दिन पुरानी पौध की ही रोपाई करें. इसके अलावा नियमित तौर पर फूलगोभी में सिंचाई करें, ध्यान रखें, सिंचाई के दौरान जल भराव बिल्कुल भी ना हो पाए. खेत से जल निकासी बेहतर होनी चाहिए. संतुलित मात्रा में उर्वरकों का इस्तेमाल करना चाहिए खासकर नाइट्रोजन की संतुलित मात्रा पर विशेष तौर पर ध्यान दें ताकि फूलगोभी में बटनिंग की समस्या ना आए.
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