जानिए कब है नरसिंह द्वादशी? जानें सही तारीख और शुभ मुहूर्त

जानिए कब है नरसिंह द्वादशी? जानें सही तारीख और शुभ मुहूर्त

फाल्गुन मास सनातन धर्म में बहुत पवित्र और ऊर्जा से भरा माना जाता है। इसी महीने के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को 'नरसिंह द्वादशी' (Narasimha Dwadashi 2026) का पावन पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का सबसे बड़ा प्रतीक है। भगवान विष्णु (Lord Vishnu) ने अपने परम भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए इसी रूप में अवतार लिया था।

नरसिंह द्वादशी 2026: तारीख और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि का समय कुछ इस प्रकार रहेगा:

द्वादशी तिथि की शुरुआत: 27 फरवरी 2026, रात 10:32 बजे।

द्वादशी तिथि का समापन: 28 फरवरी 2026, रात 08:43 बजे।

सनातन धर्म में किसी भी व्रत या त्योहार के लिए 'उदया तिथि' (सूर्योदय के समय मौजूद तिथि) को ही आधार माना जाता है। इसलिए, नरसिंह द्वादशी का मुख्य व्रत 28 फरवरी 2026 (शनिवार) को ही रखा जाएगा। व्रत का पारण (व्रत खोलने का समय) अगले दिन 1 मार्च 2026 की सुबह (लगभग 06:46 बजे से 09:05 बजे के बीच) किया जाएगा।

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नरसिंह द्वादशी की आसान पूजा विधि

स्नान और वस्त्र: सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। पीले रंग के साफ कपड़े पहनें, क्योंकि पीला रंग भगवान विष्णु को बेहद प्रिय होता है।

मूर्ति स्थापना: घर के मंदिर की सफाई करके भगवान नरसिंह की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। अगर वह उपलब्ध न हो, तो आप भगवान लक्ष्मी-नारायण (विष्णु जी) की तस्वीर रखकर भी पूजा कर सकते हैं।

पूजा सामग्री: अपना मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखें। भगवान को पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें पीले फूल, ताजे फल, अक्षत (बिना टूटे चावल) और धूप-दीप अर्पित करें।

मंत्र और पाठ: पूजा के दौरान 'विष्णु सहस्त्रनाम' या 'नरसिंह स्तोत्र' का पाठ करना मानसिक शांति और शक्ति देता है।

भोग और आरती: अंत में भगवान को पीली मिठाई या अपनी श्रद्धा के अनुसार सात्विक भोग लगाएं। इसके बाद आरती करें और परिवार के सभी लोगों में प्रसाद बांटें।

नरसिंह द्वादशी का महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब असुरराज हिरण्यकश्यप के अत्याचार बहुत बढ़ गए और उसने अपने ही बेटे प्रहलाद को मारने की कोशिश की, तब भगवान विष्णु ने एक खंभे को चीरकर 'नरसिंह' (आधा सिंह और आधा मनुष्य) रूप में अवतार लिया था।

यह दिन हमें सिखाता है कि ईश्वर अपने सच्चे भक्तों की रक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। मान्यता है कि नरसिंह द्वादशी का व्रत रखने और सच्चे मन से प्रार्थना करने से व्यक्ति के अंदर गजब का साहस पैदा होता है। उसके जीवन से हर तरह का डर, दुख-दर्द और नकारात्मकता हमेशा के लिए दूर हो जाती है।










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