सुकमा : जिले के ग्रामीण अंचलों, विशेषकर दूरस्थ क्षेत्रों के विकास को गति देने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। शुक्रवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित जिला स्तरीय पुनरीक्षण समिति (डीएलसीसी) एवं जिला स्तरीय परामर्शदात्री समिति (डीएलआरसी) की संयुक्त बैठक में कलेक्टर अमित कुमार ने स्पष्ट किया कि प्रशासन का लक्ष्य केवल कागजी आंकड़े नहीं, बल्कि धरातल पर बदलाव लाना है।बैठक में कलेक्टर ने एक बड़ी पहल करते हुए घोषणा की कि कोंटा विकासखंड के दूरस्थ पंचायतों में जो भी बैंक अपनी शाखाएं खोलने के लिए आगे आएंगे, जिला प्रशासन उन्हें भवन और बड़े बैंक खाते उपलब्ध कराएगा। इसका उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं को उन इलाकों तक ले जाना है जहाँ आज भी बुनियादी वित्तीय सुविधाएं पहुँच से बाहर हैं।
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बैठक की बड़ी बातें और निर्देश-
किसानों को प्राथमिकता कृषि विभाग के उप संचालक को निर्देशित किया गया कि जिले के हर किसान के पास किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) होना अनिवार्य है। इसके लिए विशेष शिविर लगाकर छूटे हुए किसानों को तत्काल लाभान्वित किया जाए। पीएम सूर्यघर योजना के हितग्राहियों के आवेदन का निराकरण तत्काल किया जाए। सीडी-रेश्यो में सुधार कलेक्टर ने सभी बैंकों को अपना 'क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो’ सुधारने हेतु ठोस कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए, ताकि जिले में ऋण वितरण और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिल सके। स्व-सहायता समूहों का सशक्तिकरण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बैंक समूहों को ऋण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को सरल और बाधा मुक्त बनाएं।सामाजिक सुरक्षा का कवच प्रधानमंत्री जनधन योजना, मुद्रा योजना, पीएमजेजेबीवाई और फसल बीमा जैसी योजनाओं की प्रगति की कड़ी समीक्षा की गई।
प्रशासन और बैंकों का साझा प्रयास
बैठक में जिला पंचायत सीईओ मुकुन्द ठाकुर ने भी विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन पर जोर दिया। इस अवसर पर लीड बैंक मैनेजर विकास कुमार सहित स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी और छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक उपस्थित रहे।
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