अराजकता भी शर्मसार हो गई राहुल गाँधी के आगे कांग्रेस कलंकित हो गई, चाणक्य के सूत्र वाक्य की परिणीति है राहुल का ये आचरण, विदेशी माँ के कोख से जन्मी संतान के राष्ट्रप्रेम की आशंका चाणक्य ने व्यक्त की थी आज वह शब्द सह चरितार्थ हो गया, राहुल अराजक तो थे ही अपनी सत्ता लोलुपता को भी प्रदर्शित कर दिया,कांग्रेस की स्थापना अंग्रेजों ने की थी कई अंग्रेज उसके अध्यक्ष रहे, उन्हीं अंग्रेजो के सामने कांग्रेसियों ने शर्टलेस प्रदर्शन कर अपने शेमलेस होने का प्रमाण दे दिया, AI के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में विरोध की वजह US डील कैसे बन सकती है? पूर्व सेना अध्यक्ष नरवणे की किताब को लेकर जो उछल कूद राहुल गाँधी ने मचाई थी, वों नरवणे के बयान के साथ ही झूठा साबित हो गया ,इस झूठ से बचने की भौंडी चाल थी ,जिसे कांग्रेसी प्रदर्शन कह रहे, राहुल जिस दिन से कांग्रेस की राजनीति के केंद्र बने हैं ,तब से लेकर आज तक कांग्रेस को ख्याति कम कुख्याति ज्यादा मिली है, जो व्यक्ति अमेठी की अपनी पारंपरिक सीट हार गया उसकी समझाने की क्षमता तोला भर नहीं है, इसीलिए देश की जनता ने राहुल को सत्ता की चाबी नहीं सौपी, हार से हताश राहुल आत्मावलोकन की जगह देशवासियों और देश की आलोचना कर रहे ,राहुल अपने आपकों विशेषाधिकार संपन्न समझतें हैं जिनके आगे नियम कानून बौने हैं ,वों संसद में भी अपनी मर्जी चलाना चाहतें है और सड़क में भी यही कर रहे।
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कांग्रेस विशाल वट वृक्ष था उसके अवसान के पीछे कारण तो ढेरों हैं पर कांग्रेस की वर्तमान स्थिति के लिए कोई तो जवाबदेह होगा? कांग्रेस अपना इतिहास तो लोगों को बताती है ,पर लोगों को देश का इतिहास जानने से रोकती है, इंटरनेट की इस आधुनिक दुनिया में सबकुछ एक क्लिक पर उपलब्ध है क्या -क्या कब तक छुपा लेंगे ? शिक्षा तर्कों को जन्म देगी ही आप कैसी उसकी भ्रूणहत्या कर देंगे? साम्प्रदायिक दंगे ,धर्मांतरण, मंदिरों का विध्वंस आक्रांताओं की फितरत थी, मंदिरों से सटाकर ,तोड़कर मस्जिदें बनाई गईं ,विग्रहों को तोड़कर मस्जिदो की सीढ़ियों पर लगाया गया,जजिया कर भी चलन में था गाजी ,काफ़िर से लेकर मोपका नरसंहार ,डायरेक्ट एक्शन डे और रक्त रंजित बंटवारें में हिंसा का नंगा नाच हुआ ,बंटवारें को स्वतंत्रता कह कांग्रेसियों ने राज तो पा लिया पर क्या साम्प्रदायिकता से देश को निजात मिला? राजा दाहिर से लेकर गाँधी जी तक को सहिष्णुता का कोई सकारात्मक परिणाम नही मिला, वर्शिप एक्ट ,वक्फ कानून ,शाहबानों प्रकरण एकतरफा तुष्टीकरण के द्योतक हैं, कांग्रेसियों के बीच अंधी दौड़ चल रही जिसमें वों गाँधी जी से बड़ा सहिष्णु बनने की चाह रख रहे, विकास बिना सुरक्षा और शांति के कैसे कायम रहेगा ?
देश की प्रगति के साथ -साथ साम्प्रदायिकता बढ़ती रही और कांग्रेस ने पुरे मनोयोग से उसे पल्लवित और पोषित किया, पुरे उत्तर पूर्व के राज्य और आदिवासी क्षेत्र ईसाई बहुल हो गए और कांग्रेस सोती रही, घुसपैठियों ने सीमावर्ती राज्यों की ही नहीं पुरे देश की डेमोग्राफी चेंज कर दी पर कांग्रेस ने अपने सोचने का ग्राफ नहीं चेंज किया, 1947 में मिले बंटवारें को भूल 1971 में फिर भूल की बांग्लादेश बनने से हमें क्या मिला ? हिंदू वहां तब भी तकलीफ में थे आज भी हैं ,क्या इन कारकों ने देश के मतदाताओं पर अपना प्रभाव नहीं डाला? राष्ट्रवाद की कमी की वजह से मुट्ठी भर आक्रांताओं ने हम पर राज किया ऐसे में राष्ट्रवाद को जागृत होना ही था, बिना आत्मसम्मान के विकास की क्या अहमियत ? राहुल की दूसरी समस्या उनका गाँधी उपनाम और जाति है ,जिसको वों खुद हवा दे रहे एक दिन इसका भी भेद खुलेगा ,चींजें सार्वजनिक होंगी ,जिस जिजीविषा के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्य कर रही उतनी ही शिद्दत के साथ कांग्रेस ने कांग्रेस सेवा दल को ख़त्म किया, कांग्रेसी जमीनी राजनीति से कोसों दूर AC ऑफिस में बिना मतदाताओं के राजनीति करने में मशगूल है तो परिणाम भी उसी के अनुकूल हैं । जनभावनाओं की कद्र किये बिना कैसे आप जीत पाएंगे ? युवराज यदि अपनी विलासिता में ही सारोबार रहें बहुमत का कारोबार न समझ सके,चेहरे से उदंडता बोली में धूर्तता हो तो फिर कोई कैसे जननायक बनें ? साधन ,परिस्थितियां होने के बाद भी आप वंचित हैं, मोदी एक मौके और सुशासन की वजह से जनभावनाओं के अनुरूप देश के मुखिया हैं, तीसरी हार आपको बहुत अखर रही,पर राष्ट्र के विरुद्ध होकर नेता विरोधी दल नही रह पाएंगे फिर तो PM बहुत दूर की कौड़ी है राहुल जी राजनीति अपनी सुधार लीजिए क्योंकि-----------------कुर्सी के लिए बुद्धि भी चाहिए
चोखेलाल
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मुखिया के मुखारी व्यवस्था पर चोट करती चोखेलाल की टिप्पणी
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