दलहनी फसलों के रूप में चना, उड़द, मूंग और अरहर की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. इन फसलों में मूंग किसानों के लिए विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है ऐसे मे किसान फरवरी मार्च के दौरान मूंग की बुवाई करते हैं. वे उन्नत किस्मों का चयन कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. मूंग की यह फसल गर्मी के मौसम में जल्दी तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को कम समय में अधिक पैदावार क़े साथ बढ़िया आमदनी प्राप्त कर सकते हैं.
मौजूदा समय में किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ दलहनी फसलों की खेती पर विशेष ध्यान दे रहे हैं. दलहन नगदी फसल होने के कारण बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है. ऐसे में मूंग की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है. मूंग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह फसल कम समय में तैयार हो जाती है और कम लागत में अच्छी पैदावार देती है. साथ ही इसकी खेती से मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है ऐसे में किसान मूंग की खेती से अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं तो इसकी कुछ उन्नत किस्मे है जिनकी खेती कर अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.
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दलहनी फसलों के रूप में चना, उड़द, मूंग और अरहर की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. इन फसलों में मूंग किसानों के लिए विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है ऐसे मे किसान फरवरी मार्च के दौरान मूंग की बुवाई करते हैं. वे उन्नत किस्मों का चयन कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. मूंग की यह फसल गर्मी के मौसम में जल्दी तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को कम समय में अधिक पैदावार क़े साथ बढ़िया आमदनी प्राप्त कर सकते हैं.
पीडीएम11 मूंग की यह वैरायटी गर्मी के दिनों में 8 से 10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक की उपज दे देती है, और यह 60 से 65 दिन की फसल होती है अगर फरवरी के महीने में इसकी बुवाई हो जाए तो यह अप्रैल के आखिरी सप्ताह तक बाजार में बेची जा सकती है.
हम-16 किस्म, यह बुआई के बाद 55 से 58 दिन में कटकर घर आ जाती है, गर्मी के मौसम में कम समय में पकने वाली किस्म है, साथ ही इसमें पीला मोजेक होने का भी खतरा नहीं होता है, इसकी उपज 16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक मिल जाती है.
मूंग कल्याणी यह किस्म दो से तीन पानी में पककर तैयार हो जाती है. इस किस्म की खासियत यह है कि इसकी फली लंबी गुच्छों में होती है और इसका दाना मोटा और गहरे हरे रंग का चमकदार होता है। मूंग की इस किस्म से प्रति एकड़ उत्पादन 6-7 क्विंटल पैदावार प्राप्त की जा सकती है.
मोहिनी मूंग की मोहनी किस्म 70-75 दिन में पक कर तैयार हो जाती है. इसकी हर फली में 10-12 बीज और दाने छोटे होते हैं. मूंग इस किस्म में पीला मोजैक वायरस को सहन करने की क्षमता होती है. इस किस्म से प्रति हेक्टेयर 10-12 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है.
एच यू एम - 1 मूंग की इस किस्म के पौधे पर बहुत ही कम मात्रा में फलिया पाई जाती है. मूंग की यह किस्म लगभग 65 -70 दिन के अंदर पक कर तैयार हो जाती है. साथ ही मूंग की फसल में लगने वाले पीले मोजक रोग का भी इस पर कम प्रभाव पड़ता है.
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