कौन हैं आशुतोष ब्रह्मचारी? जिन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर लगाया है यौन शोषण का आरोप

कौन हैं आशुतोष ब्रह्मचारी? जिन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर लगाया है यौन शोषण का आरोप

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने पर शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने इस कदम का स्वागत किया है। वह जगद्गुरु रामभद्राचार्य के प्रमुख शिष्य हैं। आशुतोष महाराज ने कहा कि न्याय के मंदिर से उन्हें न्याय मिला है।कोर्ट के आदेश के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "हमारे नाबालिग बच्चों के साथ हुए यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के मामले में झूंसी पुलिस स्टेशन को आदेश दिए गए हैं। अब हमें भरोसा है कि वह दिन दूर नहीं जब सनातन धर्म के नाम पर अपराध करने वाले और पाखंडी, जो खुद को नकली शंकराचार्य कहते हैं, उनका सच सामने आएगा।"

यह विवाद आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की शिकायत से शुरू हुआ। वह श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट (मथुरा) के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने जनवरी में अदालत में धारा 173(4) CrPC के तहत अर्जी दाखिल की थी। आरोप है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के आश्रम या शिविरों (जैसे वाराणसी के विद्या मठ) में गुरुकुल की आड़ में नाबालिग बच्चों का यौन शोषण किया गया। अदालत में आशुतोष ब्रह्मचारी ने दो पीड़ित बच्चों को पेश किया और कुछ सबूत जैसे CD भी प्रस्तुत किए। उनका दावा है कि इस तरह 20 से अधिक बच्चों के साथ दुर्व्यवहार हुआ है।

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कृष्ण जन्मभूमि विवाद में मुख्य वादी है शिकायतकर्ता

आशुतोष ब्रह्मचारी उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कांधला के निवासी हैं। उनका मूल नाम आशुतोष पांडेय था। पहले वे विश्व हिंदू परिषद (मेरठ प्रांत) में गौ रक्षा प्रमुख रह चुके हैं। अब मथुरा में रहकर वे कृष्ण जन्मभूमि विवाद में मुख्य वादी के रूप में सक्रिय हैं। अदालत के फैसले के बाद उन्होंने कहा कि न्याय हुआ है और वे सत्य की लड़ाई जारी रखेंगे। वे सनातन धर्म और गौ रक्षा जैसे विषयों पर भी लगातार काम करते हैं।

संपूर्णानंद विश्वविद्यालय से ली है शिक्षा

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपनी उच्च शिक्षा वाराणसी के प्रसिद्ध संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से पूरी की। उन्होंने यहां से शास्त्री और आचार्य की उपाधियां प्राप्त की, जिसमें नव्य व्याकरण जैसे विषयों में विशेष दक्षता हासिल की। छात्र जीवन में वे काफी सक्रिय रहे और छात्र राजनीति में भाग लिया। 1994 में उन्होंने विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव में जीत हासिल की और छात्रसंघ अध्यक्ष बने। 15 अप्रैल 2003 को उन्हें अपने गुरु से दंड संन्यास की दीक्षा मिली।

माघ मेले से शुरू हुआ था पूरा विवाद

कुछ दिन पहले माघ मेले के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ विवाद के बाद अविमुक्तेश्वरानंद विवाद सुर्खियों में आया था। उस समय प्रशासन के साथ झड़प हुई थी, जिसके बाद धरना और राजनीतिक बयानबाजी हुई। अब POCSO केस में एफआईआर दर्ज होने से मामला और गंभीर हो गया है। जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।

कोर्ट ने 13 फरवरी को मामले की सुनवाई की। इस दौरान आशुतोष ब्रह्मचारी ने अपने आरोपों को साबित करने के लिए दो नाबालिग पीड़ितों को भी पेश किया। कोर्ट ने उनके बयान दर्ज किए और पुलिस रिपोर्ट को संज्ञान में लेने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

 








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