पैरेंटिंग के 5 रेड फ्लैग्स जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं

पैरेंटिंग के 5 रेड फ्लैग्स जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं

माता-पिता बनना दुनिया का सबसे खूबसूरत और जिम्मेदारी भरा काम है। हम सभी अपने बच्चों से बेइंतहा प्यार करते हैं और चाहते हैं कि वे जीवन में खूब तरक्की करें, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हमारी कुछ रोजमर्रा की आदतें, जिन पर हम शायद ध्यान भी नहीं देते, बच्चों के कोमल मन और उनके भविष्य पर गहरा असर डाल रही हैं?

कहा जाता है कि बच्चे गीली मिट्टी की तरह होते हैं। वे लेक्चर से कम और अपने माता-पिता को देखकर ज्यादा सीखते हैं। आइए आज उन 5 बड़े संकेतों के बारे में बात करते हैं, जो यह बताते हैं कि कहीं अनजाने में हमारी कोई आदत बच्चे का नुकसान तो नहीं कर रही।

बच्चों के सामने हमेशा फोन या लैपटॉप में खोए रहना

आजकल गैजेट्स हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गए हैं, लेकिन अगर आप बच्चों के साथ बैठकर भी हमेशा फोन की स्क्रीन स्क्रॉल कर रहे हैं, तो यह एक खतरे की घंटी है। बच्चे इससे यह सीखते हैं कि आपसी बातचीत से ज्यादा जरूरी फोन है। जब आप उनकी बातों पर ध्यान नहीं देते, तो वे अकेलापन महसूस करने लगते हैं और धीरे-धीरे वे खुद भी स्क्रीन के आदी हो जाते हैं। बच्चों के साथ बिताए गए समय में फोन को दूर रखने की कोशिश करें।

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बात-बात पर दूसरों के बच्चों से तुलना करना

"देखो तुम्हारे दोस्त के कितने अच्छे नंबर आए हैं!" या "तुम अपनी चचेरी बहन की तरह समझदार क्यों नहीं हो?" - अगर आप भी जाने-अनजाने में ऐसी बातें कहते हैं, तो आज ही रुक जाइए। लगातार तुलना करने से बच्चे का आत्मविश्वास बुरी तरह टूट जाता है। उन्हें लगने लगता है कि वे आपके प्यार के काबिल नहीं हैं। हर बच्चा अपने आप में खास होता है, उसकी तुलना किसी और से करने के बजाय उसकी खूबियों को पहचानें।

बच्चे की हर परेशानी खुद सुलझाने की कोशिश

माता-पिता होने के नाते हम नहीं चाहते कि हमारे बच्चे को कोई तकलीफ हो, लेकिन अगर आप स्कूल के छोटे-मोटे झगड़ों से लेकर होमवर्क तक, उनकी हर समस्या खुद सुलझा देते हैं, तो आप उन्हें कमजोर बना रहे हैं। बच्चों को अपनी गलतियों से सीखने का और खुद गिरकर उठने का मौका दें। अगर वे आज अपनी छोटी परेशानियां खुद नहीं सुलझाएंगे, तो कल जिंदगी की बड़ी चुनौतियों का सामना कैसे करेंगे?

अपने गुस्से या तनाव को बच्चों पर निकालना

क्या आप ऑफिस या घर के तनाव में अक्सर बच्चों पर चिल्ला देते हैं? बच्चे बहुत सेंसिटिव होते हैं और वे घर के माहौल को स्पंज की तरह सोखते हैं। बच्चे भावनाओं को संभालना अपने माता-पिता से ही सीखते हैं। अगर वे आपको बात-बात पर गुस्सा करते देखेंगे, तो या तो वे खुद बहुत आक्रामक हो जाएंगे या फिर अंदर से डरकर चुपचाप रहने लगेंगे। बच्चों के सामने अपने गुस्से पर काबू रखना बहुत जरूरी है।

किए गए वादे भूल जाना या पूरे न करना

"वीकेंड पर पक्का तुम्हें घुमाने ले जाऊंगा," या "अगर तुम पास हो गए तो नई साइकिल दिलाऊंगा।" कई बार माता-पिता बच्चों की जिद खत्म करने के लिए ऐसे वादे कर देते हैं और फिर भूल जाते हैं। बच्चों के लिए आपके वादे बहुत मायने रखते हैं। जब आप बार-बार वादे तोड़ते हैं, तो बच्चों का आप पर से भरोसा उठने लगता है। वे सीखते हैं कि अपनी बात से मुकर जाना एक आम बात है। इसलिए, वही वादा करें जिसे आप सच में पूरा कर सकें।

आज से ही करें बदलाव की शुरुआत

सच तो यह है कि दुनिया में कोई भी 'परफेक्ट' माता-पिता नहीं होता। हम सभी से गलतियां होती हैं, लेकिन एक अच्छे माता-पिता की पहचान यही है कि वे अपनी गलतियों को पहचानकर उन्हें सुधारने की कोशिश करते हैं।








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