बेमेतरा 25 फरवरी 2026:- जिला बेमेतरा वर्तमान समय में गंभीर जल संकट की चुनौती का सामना कर रहा है। निरंतर गिरते भू-जल स्तर, अनियमित वर्षा, जल स्रोतों के सूखने तथा बढ़ती जल खपत के कारण आने वाले वर्षों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है। जल के बिना जीवन की कल्पना असंभव है—ऐसे में जल संरक्षण एवं संवर्धन आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है। इसी गंभीर परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए 08 मार्च 2026, विश्व महिला दिवस के पावन अवसर पर जिले में व्यापक स्तर पर “जल संरक्षण महाभियान” प्रारंभ किया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक से अपने घर, आंगन या परिसर में रिचार्ज पिट (रिचार्ज पिट) का निर्माण करने का आह्वान किया गया है, ताकि वर्षा जल को संरक्षित कर भू-जल स्तर को बढ़ाया जा सके।

जल संकट : भविष्य की बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार यदि अभी से जल संरक्षण के ठोस उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले समय में पेयजल संकट गहराता जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को दूर-दूर से पानी लाने की समस्या और अधिक बढ़ सकती है। जल के अभाव का सीधा प्रभाव स्वास्थ्य, कृषि, पशुपालन और आजीविका पर पड़ता है। जल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन की मूल आधारशिला है। यह कृषि उत्पादन, पर्यावरण संतुलन, जैव विविधता और मानव अस्तित्व का आधार है। इसलिए जल की प्रत्येक बूंद का संरक्षण हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
मुखिया के मुखारी - पैसा सबसे ज्यादा जरुरी है
“जल शक्ति से ही नारी सशक्त”
विश्व महिला दिवस पर इस अभियान को विशेष रूप से महिलाओं को समर्पित किया गया है। जल संकट का सर्वाधिक प्रभाव महिलाओं पर ही पड़ता है—उन्हें घर और परिवार की जल आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अतिरिक्त श्रम करना पड़ता है। “जल शक्ति से ही नारी सशक्त होती है” — क्योंकि जल के बिना वह अपने परिवार, बच्चों और समाज के भविष्य की कल्पना भी नहीं कर सकती। अतः इस दिवस पर जल संरक्षण का संकल्प लेना वास्तव में महिला सशक्तिकरण की दिशा में सार्थक कदम है।
रिचार्ज पिट : सरल, सस्ता और प्रभावी उपाय
जल संकट से निपटने का सबसे सरल एवं कारगर उपाय है रिचार्ज पिट का निर्माण | रिचार्ज पिट के लाभ: वर्षा जल का भू-जल में पुनर्भरण, जल स्तर में वृद्धि, हैंडपंप एवं बोरवेल की आयु में वृद्धि, जलभराव की समस्या में कमी, भविष्य के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित | रिचार्ज पिट का निर्माण कम लागत में स्थानीय संसाधनों से किया जा सकता है। घर की छत से निकलने वाले वर्षा जल को पाइप के माध्यम से गड्ढे में डालकर, उसमें गिट्टी, रेत और पत्थर की परतें लगाकर जल को धरती में समाहित किया जाता है।
जन-जन तक पहुंचेगा जल संरक्षण का संदेश
“जल संरक्षण महाभियान” के अंतर्गत ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों, स्वयं सहायता समूहों, महिला मंडलों, स्कूल-कॉलेजों एवं सामाजिक संगठनों के माध्यम से व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। रैली, संगोष्ठी एवं कार्यशालाएँ, दीवार लेखन एवं पोस्टर अभियान, सोशल मीडिया जागरूकता संदेश, स्कूलों में जल संरक्षण शपथ कार्यक्रम इन सभी माध्यमों से नागरिकों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा।
सामूहिक संकल्प से ही संभव होगा समाधान
जिले के समस्त सम्माननीय नागरिकों से अपील की गई है कि वे जल की एक-एक बूंद को व्यर्थ बहने से रोकें, घरों में रिचार्ज पिट का निर्माण करें, वर्षा जल संचयन को अपनाएँ, परिवार एवं समाज के प्रत्येक सदस्य को प्रेरित करें, बच्चों को जल संरक्षण के संस्कार दें | यदि प्रत्येक घर एक रिचार्ज पिट बनाए, तो पूरे जिले में हजारों जल संरचनाएँ निर्मित होंगी, जिससे भू-जल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि संभव होगी।
जल बचाएँ – जीवन बचाएँ
विश्व महिला दिवस के अवसर पर यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि भविष्य को सुरक्षित करने का संकल्प है। आइए, हम सब मिलकर यह प्रण लें हम जल की एक-एक बूंद बचाएंगे, वर्षा जल का संरक्षण करेंगे, रिचार्ज पिट का निर्माण करेंगे, और बेमेतरा को जल संकट से मुक्त बनाएंगे।” 08 मार्च 2026 को अपने घर में रिचार्ज पिट बनाकर महिलाओं के सम्मान में जल संरक्षण का संकल्प लें। यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी प्रकृति, मातृशक्ति और आने वाली पीढ़ियों के प्रति।
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