हिंदू पंचांग के अनुसार, भद्रा को एक विशेष समय माना जाता है जिसे शुभ कार्यों के लिए वर्जित किया गया है। ज्योतिष शास्त्र में भद्रा को एक जीवित स्वरूप माना गया है, जिसके शरीर के अलग-अलग अंगों का प्रभाव अलग होता है। विशेष रूप से होलिका दहन के समय 'भद्रा मुख' और 'भद्रा पूंछ' का विचार करना बहुत आवश्यक होता है।
मान्यताओं के अनुसार, भद्रा मुख में किया गया कोई भी शुभ कार्य विनाशकारी परिणाम दे सकता है, जबकि भद्रा पूंछ में कुछ विशेष स्थितियों में कार्य करने की अनुमति दी जाती है। इस सूक्ष्म गणित को समझे बिना किया गया दहन समाज और परिवार के लिए कष्टकारी होने की आशंका बनी रहती है।
क्या है भद्रा मुख और भद्रा पूंछ?
ज्योतिष के गणित के अनुसार, जब भद्रा का समय शुरू होता है, तो उसे एक शरीर के रूप में देखा जाता है। इसके शुरुआती हिस्से को 'भद्रा मुख' और आखिरी हिस्से को 'भद्रा पूंछ' कहते हैं। शास्त्रों की मानें तो भद्रा के मुख में अग्नि का वास होता है, इसलिए इस समय होलिका जलाने से चारों ओर दुख और अशांति फैलने की आशंका रहती है।
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वहीं, भद्रा की पूंछ को मुख के मुकाबले कम हानिकारक माना जाता है। अगर समय की बहुत कमी हो और पूर्णिमा तिथि जल्दी खत्म हो रही हो, तो विद्वान भद्रा पूंछ के समय में दहन की अनुमति देते हैं ताकि पूजा का काम सफल हो सके।
होलिका दहन में इसका महत्व
होलिका दहन के लिए सबसे आदर्श स्थिति वह होती है जब भद्रा पूरी तरह समाप्त हो चुकी हो। यदि भद्रा लगी हो, तो वह 'भद्रा रहित प्रदोष काल' की प्रतीक्षा करते हैं। भद्रा मुख का प्रभाव इतना उग्र माना गया है कि इस समय किया गया पूजन घर की बरकत को रोक सकता है।
3 मार्च 2026 की स्थिति देखें तो राहत की बात यह है कि शाम के समय भद्रा का कोई प्रभाव नहीं है। भद्रा देर रात 4 मार्च की सुबह 01:25 बजे से शुरू होगी। इसलिए शाम को प्रदोष काल में सहजता के साथ पूजा की जा सकती है, जिससे ग्रहों का शुभ फल मिलने की पूर्ण संकेत है।
ग्रहों की स्थिति और बचाव के उपाय
भद्रा काल में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक होता है, जिससे मानसिक तनाव बढ़ने की आशंका रहती है। इस समय किसी भी विवाद से बचना चाहिए और केवल मंत्रों का जाप करना चाहिए। यदि कभी ऐसी स्थिति बने कि भद्रा के कारण दहन का समय न मिल रहा हो, तो ज्योतिषियों की मदद से भद्रा पूंछ का समय निकाला जाता है।
सही समय पर किया गया दहन न केवल अग्नि देव को प्रसन्न करता है, बल्कि आपके जीवन के सही संचालन में भी सहायक होता है। मेडिटेशन के जरिए इस समय अपनी ऊर्जा को सकारात्मक बनाए रखना सबसे बेहतर उपाय है।
श्रद्धा और सही मुहूर्त का फल
शास्त्रों का पालन करना केवल परंपरा नहीं, बल्कि जीवन को अनुशासित करने का एक तरीका है। भद्रा मुख और पूंछ का ध्यान रखकर जब हम होलिका दहन करते हैं, तो वह अग्नि हमारे जीवन की समस्त बाधाओं को भस्म करने की शक्ति रखती है। इस साल भद्रा रात में होने के कारण शाम का मुहूर्त बहुत ही उत्तम है।
महादेव के आशीर्वाद से सही मुहूर्त में किया गया पूजन आपके परिवार में सुख-समृद्धि लाने की संभावना को कई गुना बढ़ा देता है। नियमों का यह पालन ही हमें ईश्वर के और करीब ले जाता है और त्योहार का आनंद बढ़ाता है।
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