रायपुर: छत्तीसगढ़ के 27 जिले के कृषि विज्ञान केंद्र में कृषि वैज्ञानिक, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक कार्यक्रम सहायक और प्रक्षेत्र प्रबंधक कार्यरत हैं. छत्तीसगढ़ कृषि विज्ञान केंद्र सर्व कर्मचारी संघ के बैनर तले ये सभी कर्मचारी 23 फरवरी से हड़ताल पर हैं. रायपुर में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के गेट पर इन्होंने डेरा डाल रखा है और हड़ताल कर रहे हैं.
कृषि वैज्ञानिक और अन्य कर्मचारियों ने लगाए आरोप
इस दौरान विश्वविद्यालय प्रबंधन पर हड़ताल स्थगित करने के लिए दबाव बनाने का आरोप हड़ताली कर्मचारी लगा रहे हैं. कृषि विज्ञान केंद्र में काम करने वाले कृषि वैज्ञानिक और वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि हमसे 12 महीने काम लिया जाता है, लेकिन हमें केवल 10 महीने का वेतन दिया जाता है. हमको एनपीएस या जीपीएफ का लाभ भी नहीं मिल रहा है. दुर्ग जिले के पांहदा कृषि विज्ञान केंद्र के प्रक्षेत्र प्रबंधक आरती टिकरिया ने बताया कि "पिछले आठ दिन से हम लोग प्रदर्शन कर रहे हैं और हमें विश्वविद्यालय के अंदर भी नहीं जाने दिया जा रहा है. गेट में ताला लगा दिया गया है. वेतन की हमें दिक्कत है. हमारी मांग संवैधानिक है और हम संवैधानिक तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं.
मुखिया के मुखारी - पैसा सबसे ज्यादा जरुरी है
हमसे 12 महीने काम लिए जाते हैं लेकिन हमें सैलरी 10 महीने की दी जाती है. विश्वविद्यालय प्रबंधन से बातचीत के लिए बुलावा आया था लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. केवल आश्वासन ही मिला. सातवें आठवें दिन प्रदर्शनकारियो से विश्वविद्यालय प्रबंधन ने बात की थी. विश्वविद्यालय प्रबंधन ने हमें धमकी दी है कि हड़ताल खत्म कर दीजिए- आरती टिकरिहा, प्रक्षेत्र प्रबंधक, कृषि विज्ञान केंद्र पांहदा
"हमारी मांगें नहीं मानी गई तो हम राज्यपाल से मिलेंगे"
छत्तीसगढ़ कृषि विज्ञान केंद्र और सर्व कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि हम लोग अपनी मांग को लेकर 16 फरवरी से 20 फरवरी तक हड़ताल पर थे. इस पर कोई बात नहीं बनी. इसके बाद हम लोग 23 फरवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. विश्वविद्यालय प्रबंधन के साथ हमारी तीन बार बातचीत भी हो चुकी है, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं निकल पाया है.अगर हमारी मांगें नहीं मानी जाती है तो हम लोग राज्यपाल से मुलाकात करेंगे. जिसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी.
कृषि विज्ञान केंद्र में कार्यरत लोगों की सैलरी की बात करें तो 2 से 3 महीने की सैलरी नहीं मिल पाई है. जबकि हम लोग 12 महीने काम करते हैं और हमें सैलरी के नाम पर केवल 10 महीने की सैलरी दी जाती है-डॉ. प्रदीप कुमार सिंह, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ कृषि विज्ञान केंद्र सर्व कर्मचारी संघ
पूरा वेतन देने की मांग
बालोद कृषि विज्ञान केंद्र के कार्यक्रम सहायक डॉक्टर दीपशिखा मनु चंद्राकर ने बताया कि "हमारी सबसे पहली मांग पूर्ण वेतन की है. हमें 12 महीने काम कराया जाता है, लेकिन वेतन केवल 10 महीने का दिया जाता है. केंद्र से मिलने वाली राशि मिल रही है, लेकिन राज्य से मिलने वाली राज्यांश राशि हमें नहीं मिल रही है.
जब हमसे 12 महीने काम लिए जाते हैं तो हमें 12 महीने की सैलरी दी जाए. हम लोग पहले 5 दिन की हड़ताल किए थे, लेकिन हमारी मांग पूरी नहीं हुई ऐसी स्थिति में हमें मजबूरन 23 तारीख से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठना पड़ रहा है- डॉ. दीपशिखा मनु चंद्राकर, कार्यक्रम सहायक, कृषि विज्ञान केंद्र बालोद
महिला कर्मचारियों को हो रही ज्यादा परेशानी
हड़ताली डॉक्टर दीपशिखा चंद्राकर ने बताया कि इस दौरान हमें कई तरह की समस्याओं का सामना भी करना पड़ रहा है. पुरुषों की तुलना में महिलाओं को ज्यादा समस्या है, क्योंकि उन्हें घर परिवार देखने के साथ ही प्रदर्शन स्थल पर भी बैठना होता है. इस दौरान हम मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान हो रहे हैं.
कृषि विज्ञान केंद्र के कर्मचारियों की मांगें
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