फरवरी का महीना समाप्त होने वाला है. मार्च की शुरुआत के साथ ही तापमान में बढ़ोतरी होने लगती है. बदलते मौसम का सीधा असर खेतों में खड़ी फसलों पर पड़ता है, इसलिए मार्च का महीना किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. यदि इस समय सही प्रबंधन नहीं किया गया, तो उत्पादन प्रभावित हो सकते हैं. ऐसा प्याज की फसल के साथ भी हो सकता है. कृषि विशेषज्ञ अनुपम चतुर्वेदी नेबताया, मार्च में बढ़ती गर्मी के कारण प्याज की फसल को संतुलित पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है.
विशेषज्ञ ने आगे बताया, प्याज की गांठ बनने के समय प्रति एकड़ 20 किलोग्राम नाइट्रोजन देना चाहिए. इसके साथ ही 10 किलोग्राम पोटाश और 5 किलोग्राम सल्फर का उपयोग फसल के लिए लाभकारी होता है. यह भी सलाह दी कि बोरॉन और जिंक सल्फेट का छिड़काव करने से प्याज की गुणवत्ता में सुधार होता है. इससे फसल जल्दी पकती है. कंद का आकार एकसमान रहता है, जिससे बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ जाती है. अमूमन मंडी में प्याज इसलिए नहीं रिजेक्ट कर दी जाती है, क्यों उसका आकार ठीक नहीं होता.
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सिंचाई का जानें सही तरीका
सिंचाई प्रबंधन पर जोर देते हुए अनुपम चतुर्वेदी ने बताया कि मार्च में तापमान बढ़ने से मिट्टी की नमी तेजी से कम होती है. ऐसे में हर 7 से 10 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई करनी चाहिए, ताकि खेत में पर्याप्त नमी बनी रहे. हालांकि, अधिक पानी देना नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि जलभराव से जड़ें गलने का खतरा रहता है. साथ ही खेत को खरपतवार मुक्त रखना भी जरूरी है.
ये देसी उपाय भी बढ़ाएंगे उपज
2 लीटर छाछ में 50 ग्राम हल्दी मिलाकर तैयार घोल का सप्ताह में एक बार छिड़काव करने से फसल को फफूंदी और बैक्टीरिया से बचाया जा सकता है. यह घोल एंटीबैक्टीरियल प्रभाव डालता है और जड़ों को मजबूत बनाने में मदद करता है. इसके अलावा 5 किलो ताजा गोबर, 500 ग्राम गुड़ और 20 लीटर पानी मिलाकर 3-4 दिन तक किण्वित घोल तैयार कर खेत में डालने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है. यह जैविक खाद सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाकर जड़ों के विकास में सहायक होती है.
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