तिल्दा-नेवरा में डिजिटल सट्टे का साम्राज्य छापे पड़े ,पर सरगना अब भी सिस्टम से बाहर

तिल्दा-नेवरा में डिजिटल सट्टे का साम्राज्य छापे पड़े ,पर सरगना अब भी सिस्टम से बाहर

तिल्दा-नेवरा  :  रायपुर जिला तिल्दा-नेवरा की फिज़ा में इन दिनों एक अनकहा शोर तैर रहा है। यह शोर है ऑनलाइन सट्टे के उस फैलते जाल का, जिसने शहर को अपने शिकंजे में जकड़ लिया है। कभी शांत माने जाने वाला यह इलाका अब डिजिटल सट्टेबाजी का अड्डा बनता दिख रहा है। मोबाइल एप्स के जरिये चल रहे इस खेल की डोर देश के अलग-अलग कोनों तक फैली बताई जाती है, लेकिन स्थानीय कार्रवाई की रफ्तार पर सवालों की धूल जमी हुई है।हाल ही में ग्राम कोहका हाउसिंग बोर्ड के पास एक मकान में ऑनलाइन सट्टा संचालन के आरोप में एक व्यक्ति पर कार्रवाई हुई। परंतु इस कार्रवाई ने संतोष कम, संदेह अधिक जन्म दिया। जानकारों का कहना है कि ऐसे नेटवर्क का संचालन अकेला व्यक्ति नहीं कर सकता; इसके पीछे संगठित तंत्र की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। फिर सवाल उठता है—क्या पूरी कड़ी पकड़ी गई, या सिर्फ एक मोहरा सामने लाया गया?

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इसी बीच चर्चा यह भी रही कि जाली नोट प्रकरण में संदिग्ध रहे एक कथित संचालक को ऑनलाइन सट्टे में भूमिका के संदेह पर हिरासत में लिया गया और कुछ घंटों बाद छोड़ दिया गया। इस घटनाक्रम ने बाजार से लेकर मोहल्लों तक कानाफूसी को हवा दे दी है। आरोप लग रहे हैं कि मोटी रकम का खेल हुआ, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है।यदि इन आशंकाओं में जरा भी सच्चाई है, तो यह केवल कानून व्यवस्था का प्रश्न नहीं, जनविश्वास की कसौटी भी है। पैसे के बल पर फलता-फूलता अवैध धंधा समाज की जड़ों को खोखला करता है। अब निगाहें संबंधित विभाग पर टिकी हैं—कार्रवाई की धार सचमुच तेज है, या सिर्फ दिखावे की चमक? समय ही बताएगा, पर जनता जवाब चाहती है।








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