मध्यप्रदेश में मार्च का महीना ककड़ी लगाने के लिए सबसे बढ़िया माना जाता है. इस समय न तो ज्यादा ठंड रहती है और न ही तेज लू चलती है. मिट्टी में नमी भी ठीक रहती है, जिससे पौधे तेजी से बढ़ते हैं. गर्मी की शुरुआत के साथ ही बाजार में ककड़ी की मांग अचानक बढ़ जाती है. ऐसे में जो किसान सही समय पर बुवाई कर लेते हैं, उन्हें अच्छे दाम मिल जाते हैं.वरिष्ठ किसान सलाहकार रमेश पटेल बताते हैं कि मार्च में बोई गई ककड़ी जल्दी तैयार हो जाती है. यानी कम समय में फसल और जल्दी आमदनी.
खेती की तैयारी ऐसे करें
ककड़ी बोने से पहले खेत की अच्छी जुताई जरूरी है. एक एकड़ में 110 से 120 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट या सड़ी गोबर खाद डालना फायदेमंद रहता है. दो बोरी यूरिया तीन हिस्सों में दें पहला आखिरी जुताई के समय, दूसरा एक महीने बाद और तीसरा 60 दिन बाद. इसके साथ 125 किलो एसएसपी, 40 किलो एमओपी और 5 किलो फ्यूरडॉन का इस्तेमाल करें.ढाई मीटर चौड़े बेड बनाएं और एक से डेढ़ मीटर दूरी पर बीज बोएं. 20-25 दिन बाद निराई-गुड़ाई करें और गर्मी बढ़ने पर हफ्ते में एक बार हल्की सिंचाई जरूर करें.
ये भी पढ़े : मुखिया के मुखारी - पैसा सबसे ज्यादा जरुरी है
कौन-सी किस्म देंगी ज्यादा उत्पादन?
रमेश पटेल के मुताबिक अर्का शीतल, लखनऊ अर्ली, पंजाब लॉन्ग मेलन-1 और करनाल सलेक्शन जैसी उन्नत किस्में बेहतर पैदावार देती हैं. सही किस्म चुनने से उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ते हैं.
सेहत के लिए भी फायदेमंद
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. आर.पी. परौहा बताते हैं कि ककड़ी में फाइबर, खनिज और विटामिन बी भरपूर होते हैं. गर्मी में यह शरीर को ठंडक देती है और पानी की कमी नहीं होने देती. कब्ज, पीलिया, बुखार और त्वचा संबंधी समस्याओं में भी यह लाभकारी मानी जाती है.
कम समय में ज्यादा मुनाफा
कुल मिलाकर, अगर किसान वैज्ञानिक तरीके अपनाएं तो 60-70 दिनों में तैयार फसल से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. गर्मी में बढ़ती मांग ककड़ी की खेती को फायदे का सौदा बना देती है.
.jpeg)

Comments