केजरीवाल की रिहाई पर बीजेपी का हमला, सुबूतों के अभाव को बताया तकनीकी आधार

केजरीवाल की रिहाई पर बीजेपी का हमला, सुबूतों के अभाव को बताया तकनीकी आधार

 नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को ट्रायल कोर्ट द्वारा सुबूतों के अभाव में शराब नीति मामले में बरी किए जाने पर भाजपा नेताओं ने शुक्रवार को तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।भाजपा नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि मामले की आगे न्यायिक जांच हो सकती है और अगर केजरीवाल ईमानदार थे तो शराब नीति वापस क्यों ली गई?

भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि अदालत ने सुबूतों के अभाव में उन्हें बरी किया है। यह एक तकनीकी मुद्दा है। सीबीआइ इस मामले में अगला कदम उठाएगी। पार्टी फैसले का विस्तार से अध्ययन करने के बाद एक सुनियोजित प्रतिक्रिया देगी। हमें सोचना चाहिए अगर आरोप निराधार थे, तो चार्ज फ्रेम कैसे लगाए गए?

भाजपा के आइटी प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि दिल्ली शराब नीति मामले में फैसला ट्रायल कोर्ट ने सुनाया है। अतीत में दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी संबंधित मामलों में कड़े और निंदनीय बयान दिए हैं। यह देखना बाकी है कि हाई कोर्ट में यह फैसला कितना खरा उतरता है। कानूनी प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।

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मालवीय ने आगे कहा कि अगर अरविंद केजरीवाल इतने ईमानदार थे, तो अनियमितताओं के सामने आने के बाद दिल्ली शराब नीति को क्यों पलटा और उसमें बदलाव क्यों किया? कई फोन और सिम कार्ड क्यों नष्ट किए गए? कमीशन 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करते हुए विक्रेताओं की संख्या में इतनी तेजी से कमी क्यों की गई? ये फैसले गंभीर और जायज सवाल खड़े करते हैं। रिश्वतखोरी कोई मनगढ़ंत बात नहीं है, ये मुद्दे अदालतों और जनता के सामने हैं।

केजरीवाल को क्लीन चिट पर कांग्रेस का भाजपा पर हमला

दिल्ली की एक अदालत द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया सहित अन्य आरोपियों को आबकारी नीति मामले में आरोपमुक्त किए जाने के बाद कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। पार्टी ने इसे पहले से तय पटकथा करार देते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक सुविधा के अनुसार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि बीजेपी “रूप बदलने वाली पार्टी” है और उसका मुख्य उद्देश्य कांग्रेस को राजनीतिक रूप से कमजोर करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस नेताओं के खिलाफ मामलों की गति तेज कर दी जाती है, जबकि अन्य दलों से जुड़े मामलों को धीमा या खत्म कर दिया जाता है।

खेड़ा ने दावा किया कि गुजरात और पंजाब में अगले वर्ष होने वाले चुनावों को देखते हुए आम आदमी पार्टी से जुड़े मामलों में कार्रवाई कमजोर पड़ सकती है। उन्होंने इसे बदले की राजनीति बताते हुए कहा कि एजेंसियों का उपयोग चुनावी औजार के रूप में किया जा रहा है।








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