सहारनपुर: जनपद सहारनपुर जो कि अपनी ‘मैंगो बेल्ट’ के नाम से मशहूर है, यहां बागवान आम की सैकड़ों किस्में उगाते हैं. मार्च का महीना चल रहा है और पेड़ों पर बौर आना शुरू हो चुका है. लेकिन इसी के साथ आम के पेड़ों पर कुछ कीट भी तेजी से सक्रिय हो रहे हैं, जो पेड़ों और पत्तों को बुरी तरीके से प्रभावित कर रहे हैं. इसमें सबसे खतरनाक है ‘स्केल इंसेक्ट’, जो धीरे-धीरे पूरे पेड़ को अपनी चपेट में ले लेता है और उत्पादन को बुरी तरह गिरा देता है.
क्या है स्केल इंसेक्ट और इसके नुकसान
यह बीमारी आम के पत्तों पर छोटे-छोटे दानों या फुंसियों की तरह दिखाई देती है. स्केल इंसेक्ट पत्तियों में लगने से पेड़ की प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे पेड़ को पूरा भोजन नहीं मिल पाता. इसका सीधा असर फलों पर पड़ता है और फल का आकार छोटा रह जाता है. यह कीट पत्तियों से निकलकर आने वाले फलों पर भी हमला कर देता है, जिससे पूरी फसल की गुणवत्ता खराब हो जाती है.
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शुरुआती लक्षण और बचाव के तरीके
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आई.के. कुशवाहा ने बताया कि यदि किसान इन दानों को फोड़ते हैं, तो उनके अंदर से बारीक कीट निकलते हैं. अगर पेड़ों पर ऐसी प्रभावित पत्तियां कम संख्या में हैं, तो सबसे पहले किसानों को उन पत्तियों को तोड़कर जला देना चाहिए या जमीन में गहरा गड्ढा खोदकर दबा देना चाहिए. किसानों को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि गिरी हुई पत्तियों को खुला न छोड़ें, क्योंकि उनसे कीट दोबारा निकलकर पेड़ों पर चढ़ सकते हैं.
दवाओं का सही चयन और स्टिकर का महत्व
डॉ. कुशवाहा ने सलाह दी है कि यदि कीट का प्रकोप ज्यादा है, तो किसान डायमेथोएट, इमामेक्टिन, इमिडा या थियामेथोक्सम में से किसी एक दवा का प्रयोग कर सकते हैं. इन दवाओं का एक सप्ताह के अंतर पर बदल-बदल कर छिड़काव करना अधिक प्रभावी रहता है. छिड़काव करते समय घोल में ‘स्टिकर’ मिलाना बहुत जरूरी है क्योंकि आम के पत्ते चिकने होते हैं और उन पर वैक्स की परत होती है, जिससे बिना स्टिकर के दवा पत्तों पर नहीं टिकती और कीट खत्म नहीं होते.
समय पर कार्रवाई है जरूरी
बागवानों को सलाह दी गई है कि वे अपने बागों की नियमित निगरानी करें क्योंकि मार्च का समय आम की फसल के लिए सबसे संवेदनशील होता है. यदि इस समय कीटों पर नियंत्रण पा लिया जाए, तो आने वाले समय में फलों की गुणवत्ता और पैदावार दोनों ही बेहतर प्राप्त होंगी. किसान किसी भी भ्रम की स्थिति में कृषि विभाग के विशेषज्ञों से सलाह लेकर ही दवाओं का छिड़काव करें ताकि फसल सुरक्षित रहे.
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