क्या इसलिए बदले जा रहें सीएम गवर्नर-सीमांचल से नया केंद्रशासित प्रदेश?

क्या इसलिए बदले जा रहें सीएम गवर्नर-सीमांचल से नया केंद्रशासित प्रदेश?

बिहार और पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों एक नया दावा तेजी से वायरल हो रहा है। बिहार के सांसद पप्पू यादव और कुछ अन्य नेताओं ने यह आशंका जताई है कि केंद्र सरकार सीमांचल और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर एक नया केंद्रशासित प्रदेश बनाने की तैयारी कर रही है।

इस दावे के पीछे कई घटनाओं को जोड़कर देखा जा रहा है-जैसे मुख्यमंत्री पद में संभावित बदलाव, राज्यपालों की नियुक्ति और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का सीमांचल दौरा। लेकिन क्या सच में ऐसा संभव है और क्या यह प्रक्रिया इतनी आसान है? आइए इसे संविधान और नियमों के आधार पर समझते हैं।

पप्पू यादव का दावा क्या है? 

बिहार के सांसद पप्पू यादव ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू कर, बिहार विधानसभा से प्रस्ताव पारित कराकर सीमांचल और बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर नया केंद्रशासित प्रदेश बनाया जा सकता है।

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दावे के मुताबिक बिहार के किशनगंज, कटिहार, अररिया और पूर्णिया तथा पश्चिम बंगाल के मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों को मिलाकर नया प्रशासनिक क्षेत्र बनाया जा सकता है। कुछ चर्चाओं में असम के धुबरी और बारपेटा जैसे जिलों का भी जिक्र किया गया।

इस क्षेत्र में मुस्लिम आबादी काफी अधिक है, कई जिलों में यह 38 से 80 प्रतिशत तक बताई जाती है। इन इलाकों की करीब 80 विधानसभा सीटों में भाजपा के केवल 14 विधायक हैं। इसलिए कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का दावा है कि अगर इन जिलों को अलग किया गया तो राज्यों का चुनावी समीकरण बदल सकता है। हालांकि फिलहाल इस तरह का कोई आधिकारिक प्रस्ताव सामने नहीं आया है।

क्यों जोड़ी जा रही हैं हाल की राजनीतिक घटनाएं?

इन दावों को हवा देने वाली कुछ हालिया घटनाएं भी चर्चा में हैं। उदाहरण के तौर पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की संभावना, कुछ राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति और गृह मंत्री अमित शाह का सीमांचल दौरा।

कुछ लोग इन घटनाओं को जोड़कर यह अनुमान लगा रहे हैं कि संसद के बजट सत्र में कोई बड़ा प्रशासनिक फैसला आ सकता है। हालांकि अभी तक केंद्र सरकार या किसी आधिकारिक दस्तावेज में इस तरह का कोई प्रस्ताव नहीं आया है।

भारत में नया राज्य या केंद्रशासित प्रदेश कैसे बनता है? 

भारत में नया राज्य या केंद्रशासित प्रदेश बनाने का अधिकार पूरी तरह संसद के पास होता है। यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 3 (Article 3) में दिया गया है। इस अनुच्छेद के तहत संसद किसी राज्य के हिस्से को अलग करके नया राज्य बना सकती है, दो राज्यों को मिलाकर नया राज्य बना सकती है या किसी क्षेत्र को केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा दे सकती है। यानी अंतिम फैसला संसद के हाथ में होता है, न कि किसी राज्य सरकार के पास।

नया राज्य बनाने की पूरी प्रक्रिया 

  1. नया राज्य या केंद्रशासित प्रदेश बनाने की प्रक्रिया कुछ चरणों में पूरी होती है।
  2. सबसे पहले इस संबंध में एक विधेयक तैयार किया जाता है। यह विधेयक संसद में तभी पेश हो सकता है जब भारत के राष्ट्रपति इसकी सिफारिश करें। राष्ट्रपति की अनुमति के बिना यह बिल पेश ही नहीं किया जा सकता।
  3. इसके बाद यदि प्रस्ताव किसी राज्य की सीमा या क्षेत्र को प्रभावित करता है तो राष्ट्रपति उस बिल को संबंधित राज्य की विधानसभा के पास राय के लिए भेजते हैं। राज्य विधानसभा इस पर बहस कर सकती है और समर्थन या विरोध दर्ज करा सकती है।
  4. लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि राज्य की राय बाध्यकारी नहीं होती। संसद चाहे तो राज्य के विरोध के बावजूद भी विधेयक को आगे बढ़ा सकती है।
  5. इसके बाद संसद के दोनों सदनों में साधारण बहुमत से बिल पास करना होता है। जब संसद बिल पारित कर देती है और राष्ट्रपति अंतिम मंजूरी दे देते हैं तो नया राज्य या केंद्रशासित प्रदेश आधिकारिक रूप से बन जाता है।

सिर्फ साधारण बहुमत से पास हो सकता है बिल 

  1. संविधान संशोधन के विपरीत, अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के गठन के लिए विशेष बहुमत की जरूरत नहीं होती।
  2. संसद के दोनों सदनों में साधारण बहुमत यानी 50 प्रतिशत से अधिक वोट मिलने पर बिल पास किया जा सकता है।

पहले भी कई बार हुआ राज्यों का पुनर्गठन 

  1. भारत में राज्यों का पुनर्गठन पहले भी कई बार हो चुका है। 1956 का राज्य पुनर्गठन अधिनियम (States Reorganisation Act) भाषाई आधार पर राज्यों के गठन का बड़ा उदाहरण है।
  2. इसके बाद वर्ष 2000 में उत्तराखंड, झारखंड और छत्तीसगढ़ बनाए गए।
  3. 2014 में तेलंगाना आंध्र प्रदेश से अलग होकर नया राज्य बना।
  4. 2019 में जम्मू-कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों-जम्मू-कश्मीर और लद्दाख-में बांटा गया।
  5. इन सभी मामलों में संसद ने अनुच्छेद 3 के तहत कानून बनाकर फैसला लिया था।

केंद्रशासित प्रदेश क्या होता है? 

  1. केंद्रशासित प्रदेश सीधे केंद्र सरकार के प्रशासन में होते हैं। यहां शासन आमतौर पर राष्ट्रपति के प्रतिनिधि यानी प्रशासक या उपराज्यपाल के माध्यम से चलता है।
  2. भारत में दिल्ली, चंडीगढ़ और पुडुचेरी जैसे कुछ केंद्रशासित प्रदेशों को आंशिक राज्य जैसा ढांचा भी मिला हुआ है, जबकि कई पूरी तरह केंद्र के नियंत्रण में होते हैं।

पप्पू यादव का दावा क्यों कमजोर पड़ता है? 

विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल पप्पू यादव के दावे को समर्थन देने वाला कोई ठोस संवैधानिक या आधिकारिक संकेत मौजूद नहीं है। नया राज्य या केंद्रशासित प्रदेश बनाना एक लंबी विधायी प्रक्रिया है, जिसमें विस्तृत राजनीतिक सहमति, प्रशासनिक तैयारी और संसद में बिल लाना जरूरी होता है।

इसके अलावा इस तरह के फैसले आमतौर पर लंबे समय तक सार्वजनिक बहस और सरकारी दस्तावेजों में दिखाई देते हैं। फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक पहल सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल सीमांचल और बंगाल के जिलों को मिलाकर नया केंद्रशासित प्रदेश बनाने की चर्चा अधिकतर राजनीतिक बयानबाजी और अटकलों पर आधारित दिखाई देती है।

 









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