सूर्य देव के राशि परिवर्तन करने की तिथि पर संक्रांति मनाई जाती है। यह दिन आत्मा के कारक सूर्य देव को समर्पित होता है। इस शुभ अवसर पर बड़ी सख्या में साधक गंगा समेत पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाते हैं। इसके साथ ही पूजा, जप-तप और दान-पुण्य करते हैं।
धार्मिक मत है कि संक्रांति तिथि पर सूर्य देव की पूजा करने से साधक पर भगवान भास्कर की कृपा बरसती है। उनकी कृपा से करियर और कारोबार में विशेष लाभ मिलता है। इसके साथ ही सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है। आइए, कर्क संक्रांति की सही तिथि एवं शुभ मुहूर्त जानते हैं-
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सूर्य राशि परिवर्तन
सूर्य देव 15 जुलाई तक मिथुन राशि में विराजमान रहेंगे। इसके अगले दिन सूर्य देव मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में गोचर करेंगे। सूर्य देव 16 जुलाई को रात 11 बजकर 44 मिनट पर कर्क राशि में गोचर करेंगे। इस राशि में सूर्य देव एक महीने तक रहेंगे। इसके बाद सूर्य देव कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में गोचर करेंगे।
कर्क संक्रांति शुभ मुहूर्त
सूर्य देव के कर्क राशि में गोचर करने की तिथि पर कर्क संक्रांति मनाई जाती है। इस प्रकार 16 जुलाई को कर्क संक्रांति मनाई जाएगी। इस दिन पुण्य काल दोपहर 12 बजकर 27 मिनट से लेकर शाम 07 बजकर 21 मिनट तक है। वहीं, महा पुण्य काल शाम 05 बजकर 03 मिनट से लेकर शाम 07 बजकर 21 मिनट तक है।
कर्क संक्रांति शुभ योग
ज्योतिषियों की मानें तो कर्क संक्रांति पर कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। कर्क संक्रांति पर सिद्धि योग का संयोग 17 जुलाई को देर रात 01 बजकर 17 मिनट तक है। इसके साथ ही पूर्व अश्लेषा और मघा नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इन योग में सूर्य देव की पूजा करने से आरोग्यता का वरदान प्राप्त होगा।
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