नई दिल्ली : बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए होने जा रहे चुनाव में चार सीटों पर एनडीए की जीत लगभग तय मानी जा रही है, मगर पांचवीं सीट का समीकरण दिलचस्प हो गया है। हार-जीत का पूरा गणित असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के पांच विधायकों की भूमिका पर टिक गया है। एआईएमआईएम के सभी विधायक मतदान में हिस्सा लेकर महागठबंधन के पक्ष में वोट करते हैं तो एनडीए की जीत मुश्किल हो सकती है। जबकि उनके मतदान से दूर रहने की स्थिति में एनडीए के लिए रास्ता आसान हो जाएगा। इस बीच ओवैसी ने अपने प्रदेश अध्यक्ष को दिल्ली बुलाया है, जिससे संकेत मिलता है कि अंतिम फैसला पार्टी के शीर्ष स्तर पर होगा।
41 विधायकों के वोट की आवश्यकता
जाहिर है, यह चुनाव सिर्फ संख्या का खेल नहीं बल्कि रिश्तों और रणनीति की परीक्षा भी बन गया है। ऐसे में 16 मार्च को होने वाला मतदान यह तय करेगा कि पांचवीं सीट पर किसकी रणनीति भारी पड़ती है। राज्यसभा की पांच सीटों के लिए चुनावी गणित के अनुसार एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों के वोट की आवश्यकता होगी।
इस आधार पर पांच सीटों के लिए कुल 205 वोट जरूरी हैं। मौजूदा स्थिति में एनडीए के पास भाजपा, जदयू और सहयोगी दलों को मिलाकर 202 विधायक हैं। इस संख्या से वह चार सीटें आराम से जीत सकता है, क्योंकि इसके लिए 164 वोट पर्याप्त हैं। चार सीटों के बाद एनडीए के पास 38 विधायक बचते हैं, जिससे पांचवीं सीट जीतने के लिए उसे कम से कम तीन अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी।
ये भी पढ़े :मुखिया के मुखारी - पैसा सबसे ज्यादा जरुरी है
एआईएमआईएम की भूमिका निर्णायक
दूसरी ओर महागठबंधन की स्थिति भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। राजद, कांग्रेस और वाम दलों को मिलाकर उसके पास 35 विधायक हैं। इसके अलावा बसपा के एक विधायक और एआईएमआईएम के पांच विधायकों का समर्थन मिल जाए तो यह संख्या 41 तक पहुंच सकती है, जो जीत के लिए जरूरी आंकड़ा है। यही वजह है कि इस चुनाव में एआईएमआईएम की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है।
ये भी पढ़े : नक्सल प्रभावित क्षेत्र भैरमगढ़ के अंकित सकनी ने रचा इतिहास
हालांकि राजनीतिक समीकरण इतने सरल नहीं हैं। विधानसभा चुनाव से पहले एआईएमआईएम ने राजद के साथ गठबंधन की कोशिश करते हुए मात्र छह सीटों की मांग की थी, लेकिन उसे महत्व नहीं मिला। पिछले विधानसभा में एआईएमआईएम के पांच में से चार विधायक राजद में शामिल हो गए थे। इन घटनाओं ने दोनों दलों के रिश्तों में दूरी पैदा की थी।
राजद को है उम्मीद
इसके बावजूद राजद को उम्मीद है कि उसके प्रत्याशी अमरेंद्र धारी सिंह के व्यक्तिगत संबंध ओवैसी के साथ होने के कारण एआईएमआईएम का समर्थन मिल सकता है। यदि एआईएमआईएम के विधायक मतदान में हिस्सा लेकर महागठबंधन के पक्ष में वोट करते हैं तो पांचवीं सीट पर मुकाबला कड़ा हो जाएगा। लेकिन अगर वे मतदान से बहिर्गमन करते हैं तो कुल प्रभावी वोटों की संख्या घटकर 238 रह जाएगी।
ऐसी स्थिति में जीत का कोटा भी कम हो जाएगा और एनडीए के पांचों उम्मीदवारों की जीत का रास्ता लगभग साफ हो सकता है। इस बीच दोनों पक्ष अतिरिक्त समर्थन जुटाने की कोशिश में लगे हैं। एनडीए की ओर से उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा पटना में डेरा डाले हुए सहयोगी दलों के नेताओं से लगातार संपर्क में हैं। वहीं राजद के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी भी अतिरिक्त वोटों की तलाश में सक्रिय हैं और बसपा तथा एआईएमआईएम के समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं।



Comments