नई दिल्ली: भारतीय टीम ने रिकॉर्ड तीसरी बार टी20 विश्व कप का खिताब अपने नाम कर इतिहास रचा। न्यूजीलैंड को फाइनल में 96 रन से हराकर भारत ने ये ऐतिहासिक खिताब अपने नाम किया। खिताबी मैच में शिवम दुबे ने अपनी बल्लेबाजी का ऐसा जलवा बिखेरा कि अहमदाबाद के पूरे नरेंद्र मोदी स्टेडियम में उनके नाम की गूंज सुनाई दी।
आखिरी ओवर में दुबे ने 24 रन ठोककर भारत को ढाई सौ के पार पहुंचाया था। उनकी इस पारी के बाद भारत को आखिर में जीत मिली। स्टेडियम ही नहीं पूरा देश जश्न में डूब गया। देर रात तक जश्न लोग मनाते रहे। इस बीच सूरज निकलने से पहले ही विश्व कप के हीरो शिवम दुबे अहमदाबाद रेलवे स्टेशन पर थे और सयाजी एक्सप्रेस की थर्ड एसी में बैठकर उन्होंने मुंबई तक का सफर किया।
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Shivam Dube ने आखिर क्यों ट्रेन से किया सफर?
दरअसल, शिवम दुबे ने पहले अपने और परिवार के लिए मुंबई जाने के लिए फ्लाइट की टिकट बुक करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कोई सीट नहीं मिली। उनके पास एक ऑप्शन था कि वो ड्राइव करके जाए, लेकिन उन्होंने ट्रेन को चुनना पसंद किया।
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, शिवम दुबे को घर पहुंचने की जल्दी थी। वह अपने 4 साल के बेटे अयान और दो साल की बेटी महविश के पास जल्द से जल्द पहुंचना चाहते थे जो मुंबई में उनके घर पर थे। आखिरकार उन्होंने पत्नी अंजुम के साथ ट्रेन से जाने का फैसला किया। दुबे अच्छी तरह जानते थे कि ट्रेन से जाना उनके लिए कितना जोखिम भरा होगा। विश्व कप स्टार को देखने, मिलने, उसके साथ फोटो खिंचाने के लिए लोगों की भीड़ टूट ही जाती है, लेकिन दुबे ने इन सबका रास्ता निकाला।
दुबे ने बताया,
कोई फ्लाइट उपलब्ध नहीं थी, इसलिए मैंने सुबह-सुबह अहमदाबाद से मुंबई के लिए ट्रेन पकड़ने का फैसला किया। हम सड़क मार्ग से भी जा सकते थे, लेकिन ट्रेन जल्दी पहुंचाती। उन्होंने आगे कहा, मैं, मेरी पत्नी और एक दोस्त ने ट्रेन से जाने का फैसला किया। थर्ड एसी के टिकट उपलब्ध थे, इसलिए हमने उसे बुक करने का निर्णय लिया। परिवार और दोस्तों में जिस किसी से भी हमने बात की वो सभी चिंता में थे। क्या होगा अगर कोई मुझे स्टेशन पर या ट्रेन में पहचान ले?
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शिवम दुबे
इस दौरान दुबे ने ये फैसला लिया कि वो अपना चेहरा ढक कर जाएंगे। मास्क लगाया और उन्होंने टोपी पहनी। पूरी बांह की टी-शर्ट पहनी और भोर में कार से स्टेशन के लिए रवाना हो गए। सोचा था कि ट्रेन सुबह-सुबह 5 बजकर 10 मिनट की है तो उस वक्त स्टेशन पर भीड़ नहीं होगी, लेकिन ऐसा नहीं था।
वहां क्रिकेट फैंस का हुजूम था। कुछ तिरंगे के रंग में रंगे हुए थे। उन्होंने बताया कि मैंने अपनी पत्नी को कहा कि मैं अपनी कार में ही इंतजार करता हूं और ट्रेन के निकलने से 5 मिनट पहले निकलूंगा। उसके बाद मैं तेजी से ट्रेन में चढ़ जाऊंगा। हुआ भी ऐसा। दुबे को थर्ड ऐसी में एक टॉप बर्थ मिली हुई थी। सफर के दौरान भी डर था कि कहीं कोई सहयात्री न पहचान ले। एक बार तो उनकी पहचान उजागर होते-होते बची।
जब टिकट चेकर आया तो उसने बोला- शिवम दुबे? वो कौन है, क्रिकेटर? उस वक्त दुबे की पत्नी अंजुम ने तत्काल सूझबूझ दिखाई और कहा, नहीं, नहीं। वो कहां से आएगा।



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