नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, तेल आपूर्ति संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ी रणनीतिक चिंता के बीच पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ ने भारत के खिलाफ अपने जासूसी नेटवर्क को फिर सक्रिय कर दिया है।
खुफिया एजेंसियों के अनुसार, इस बार आईएसआई की रणनीति इंटरनेट मीडिया माध्यमों के जरिए उच्च पदस्थ अधिकारियों को हनीट्रैप में फंसाकर रक्षा क्षेत्र से जुड़ी अत्यंत संवेदनशील जानकारियां हासिल करने की है।सूत्रों के मुताबिक, आईएसआई की प्राथमिकता इस बार छोटे सैन्य अधिकारियों के बजाय ऐसे वरिष्ठ अधिकारी हैं, जिनकी पहुंच रक्षा मंत्रालय, सामरिक खरीद और शीर्ष स्तर की गोपनीय बैठकों तक है।
किसमें बढ़ी पाकिस्तान की दिलचस्पी
जांच एजेंसियों ने हाल के मामलों में पाया है कि पाकिस्तान की दिलचस्पी भविष्य की रक्षा खरीद योजनाओं, ड्रोन तकनीक, सीमा सुरक्षा तंत्र और वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के बीच होने वाले संवेदनशील संवाद में बढ़ी है। इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्मों पर फर्जी पहचान बनाकर संपर्क स्थापित करने की कोशिशें तेज हुई हैं।
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इन प्रोफाइलों के जरिए पहले व्यक्तिगत संवाद बढ़ाया जाता है, फिर धीरे-धीरे गोपनीय सूचनाएं निकालने का प्रयास किया जाता है। कई मामलों में विदेशी नंबरों और एन्क्रिप्टेड एप्लिकेशन का उपयोग भी सामने आया है।
पुराने ढांचे में बदलाव कर रही ISI
खुफिया एजेंसियों के अनुसार, ISI अब अपने पुराने ढांचे में बदलाव कर रही है। पहले जहां इस तरह के आपरेशन पाकिस्तान से संचालित होते थे, अब भारत के भीतर ही छोटे-छोटे माड्यूल तैयार किए जा रहे हैं ताकि संदेह कम हो और संपर्क स्थानीय स्तर पर स्थापित किया जा सके। इसके लिए दिल्ली, पूर्वोत्तर राज्यों और उत्तर प्रदेश में महिलाओं की भर्ती की कोशिशें तेज की गई हैं।
इन महिलाओं का उपयोग इंटरनेट मीडिया संपर्क, व्यक्तिगत नेटवर्किंग और संवेदनशील व्यक्तियों तक पहुंच बनाने में किया जाना है।सूत्र बताते हैं कि आइएसआइ देशभर में दर्जनों नए एजेंट भी भर्ती करना चाहती है। इन एजेंटों को रक्षा प्रतिष्ठानों, सैन्य ठिकानों, संचार केंद्रों और संवेदनशील औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास सक्रिय करने की योजना है।
मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में पहले से बने कुछ माड्यूल फिर सक्रिय किए जा रहे हैं। इन क्षेत्रों को इसलिए चुना गया क्योंकि यहां रक्षा उत्पादन, सैन्य आवाजाही और सामरिक प्रतिष्ठानों की उपस्थिति अधिक है।अधिकारियों के अनुसार, इस नेटवर्क पर 2018 से काम चल रहा है।
हाई अलर्ट पर भारतीय खुफिया एजेंसियां
हालांकि भारतीय एजेंसियों द्वारा कई बार माड्यूल ध्वस्त किए जाने के कारण गतिविधियां कुछ समय के लिए धीमी पड़ी थीं, लेकिन हाल के महीनों में फिर तेजी दर्ज की गई है। एजेंटों को भर्ती करने के लिए भारी रकम की पेशकश की जा रही है।
भारतीय खुफिया एजेंसियां इस खतरे को देखते हुए हाई अलर्ट पर हैं। रक्षा प्रतिष्ठानों, मंत्रालयों और संबंधित विभागों को साइबर एवं इंटरनेट मीडिया संपर्कों को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।


