ऊर्जा संकट के बीच सरकार ने उठाए बड़े कदम

ऊर्जा संकट के बीच सरकार ने उठाए बड़े कदम

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में संकट के कारण देश की ऊर्जा आपूर्ति में बाधाओं के मद्देनजर सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए कई उपाय किए हैं। केरोसिन के घरेलू उपयोग को अस्थायी रूप से पुन: शुरू कर दिया है और होटलों और रेस्तरां में कोयले तथा अन्य वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग की अनुमति दे दी गई है।यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ईरान युद्ध के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद हो गया है, जिससे होकर भारत के कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी आयात का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है।

अतिरिक्त केरोसिन दिया गया

राज्यों को लगभग एक लाख किलोलीटर के नियमित मासिक कोटे के अलावा घरों में खाना पकाने की जरूरतों के लिए 48 हजार किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन दिया गया है। पर्यावरण नियामकों से अनुरोध किया गया है कि वे होटलों और रेस्तरां के लिए एक महीने के लिए बायोमास और कोयले को वैकल्पिक ईंधन के रूप में अनुमति दें। कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति को सीमित किया गया है। शहरी क्षेत्रों में एलपीजी सिलिंडर अब 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन के बाद बुक होगा।

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घबराहट में की गई एक्स्ट्रा कुकिंग गैस की बुकिंग

अधिकारियों का कहना है कि एलपीजी बुकिंग में अचानक हुई बढ़ोतरी का मुख्य कारण वास्तविक आपूर्ति की कमी नहीं बल्कि घबराहट में की गई बुकिंग है। जमाखोरी और अवैध बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए कदम उठाए गए हैं। ये उपाय वैश्विक ऊर्जा संकट के अस्थायी समाधान हैं। सरकार आपूर्ति और वैकल्पिक आयात मार्गों पर नजर रख रही है, साथ ही घरेलू खाना पकाने के ईंधन और अस्पतालों एवं शैक्षणिक संस्थानों जैसे आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रही है।

केरोसिन के उपयोग को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का किया जा रहा था प्रयास भारत प्रदूषण संबंधी चिंताओं और पेट्रोल में मिलावट के लिए इसके दुरुपयोग के कारण पिछले एक दशक से इसके उपयोग को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का प्रयास कर रहा था।

2014 में दिल्ली बना था केरोसिन-मुक्त शहर

17 जून, 2014 को दिल्ली को भारत का पहला केरोसिन-मुक्त शहर घोषित किया गया था। 2012 में शुरू की गई पहल के तहत घरों में प्रदूषण और आग के जोखिम को कम करने के उद्देश्य से केरोसिन के उपयोग को एलपीजी कनेक्शन से बदल दिया गया था।

ग्रामीण घरों में, खाना पकाने के लिए लकड़ी और कोयले के उपयोग को कम प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गरीबों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए। हालांकि, एलपीजी की आपूर्ति पर दबाव के चलते घरों में खाना पकाने के ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केरोसिन को अस्थायी रूप से फिर से शुरू किया जा रहा है।

देश में पेट्रोल या डीजल की कमी नहीं

सरकार का कहना है कि वैश्विक व्यवधान के बावजूद देश में पेट्रोल या डीजल की कमी नहीं है - रिफाइनरियां उच्च क्षमता से काम कर रही हैं, कुछ मामलों में तो यह क्षमता 100 प्रतिशत से भी अधिक है।- कच्चे तेल की आपूर्ति कई स्त्रोतों से सुनिश्चित की गई है।- भारत 27 देशों के बजाय अब लगभग 40 देशों कच्चे तेल खरीद रहा है।

एलपीजी आपूर्ति पर दबाव क्यों है?

संकट से पहले, एलपीजी आयात का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत जैसे खाड़ी देशों से आता था। अब इन आपूर्तियों में बाधा आई है।

सरकार के अनुसार खाड़ी देशों से उपलब्ध एलपीजी के साथ ही अब अमेरिका, नार्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस से भी एलपीजी की आपूर्ति की जा रही है। घरेलू एलपीजी उत्पादन में भी 28 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।









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