लू से बचाव एवं उपाय के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी की गई समसामयिक सलाह

लू से बचाव एवं उपाय के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी की गई समसामयिक सलाह

कांकेर, 15  मार्च 2026 : मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.सी. ठाकुर द्वारा लू (हीट स्ट्रोक) के बचाव के संबंध में समसामयिक सलाह देते हुए कहा कि सम्पूर्ण विश्व में जलवायु परिवर्तन के कारण वैश्विक तापमान में औसत वृद्धि हुई है, जिसके कारण प्रदेश के साथ हमारे जिले में भी भीषण गर्मी पड़ने एवं लू चलने की संभावना हैं। गर्मी के कारण सामान्य जनमानस का जीवन प्रभावित होता है। हीट वेव जिसे समान्य भाषा में लू चलना कहा जाता है, जब वातावरण का तापमान 40  डिग्री सेलशियस या 104 डिग्री फेरनहाईट से अधिक हो तो हीट वेव की स्थिति उत्पन्न होती है, इसका असर बच्चों, बुजूर्गो एवं कोमार्बिड लोगों में सर्वाधित होता है। हमारे शरीर के टेम्परेचर रेग्यूलेशन (तापमान नियंत्रण) मस्तिष्क के हाईपोथलेमस भाग से होता है। जब वातावरण का तापमान 40 डिग्री सेलशियस या 104 डिग्री फेरनहाईट से अधिक हो जाता है, तब टेम्परेचर रेग्यूलेशन तंत्र प्रभावित होता है, परिणाम स्वरूप तब हीट स्ट्रोक या लू लगना की स्थिति उत्पन्न होती है। इससे तेज बुखार आता है तथा बुखार की सामान्य दवाईयों से बुखार नही उतरता है एवं इससे मृत्यु भी हो सकती है।

लू के लक्षण 
सिर में भारीपन और दर्द का अनुभव होना, तेज बुखार के साथ मुंह का सूखना, चक्कर और उल्टी आना, भूख कम लगना, बेहोश होना, कमजोरी के साथ शरीर में दर्द होना, शरीर का तापमान अधिक होने के बावजूद पसीने का ना आना, अधिक प्यास लगना और पेशाब कम होता है।

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लू लगने पर किया जाने वाला प्रारंभिक उपचार 
बुखार पीडि़त व्यक्ति के सर पर ठंडे पानी की पट्टी लगावें, अधिक पानी व पेय पदार्थ पिलावें जैसे कच्चे आम का पना, जलजीरा आदि, पीडि़त व्यक्ति को पंखे के नीचे हवा में लेटा देवें, शरीरी पर ठंडे पानी का छिड़काव करते रहें तथा पीडि़त व्यक्ति को शीघ्र ही किसी नजदीकी चिकित्सालय या अस्पताल में इलाज के लिए ले जावे, मितानिन, ए.एन.एम से ओ.आर.एस की पैकेट हेतु संपर्क करें।

लू से बचाव के उपाय                
बहुत अनिवार्य न हो तो घर से बाहर न जावें, धूप में निकलने से पहले सर व कानो को कपड़े से अच्छी तरह से बांध ले, पानी अधिक मात्रा में पीये, अधिक समय तक धूप में न रहे, गर्मी के दौरान नरम, मुलायम सूती के कपड़े पहनने चाहिए, ताकि हवा और कपडे पसीने को सोखते रहे, अधिक पसीना आने की स्थिति में ओ.आर.एस घोल पीये, चक्कर आने, मितली आने पर छाया-दार स्थान पर आराम करें तथा शीतल पेय जल अथवा उपलब्ध हो तो फल का रस, लस्सी, मठा आदि का सेवन करें। प्रारंभिक सलाह के लिए 104 आरोग्य सेवा केन्द्र से निःशुल्क परामर्श लिया जावें। 









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