विधानसभा में अमानक चावल और धान नुकसान का मुद्दा गरमाया, विपक्ष का वॉकआउट

विधानसभा में अमानक चावल और धान नुकसान का मुद्दा गरमाया, विपक्ष का वॉकआउट

रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को विपक्ष ने अमानक चावल और धान खरीदी केंद्रों में उठाव में देरी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। विधायक रामकुमार यादव और नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने सरकार से पूछा कि जब धान का उठाव समय पर नहीं होता, तो खराब होने वाले अनाज के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की जाएगी? इस दौरान सक्ती जिले में ‘चूहों द्वारा धान खाने’ और ‘धान रिसाइक्लिंग’ के आरोपों पर तीखी बहस हुई।

प्रश्नकाल के दौरान विधायक रामकुमार यादव ने सक्ती जिले का हवाला देते हुए कहा कि उठाव न होने के कारण वहां लगभग 30 करोड़ रुपये का धान चूहों ने खराब कर दिया। उन्होंने खाद्य मंत्री दयालदास बघेल से सीधे सवाल किया, “क्या आप उन दोषी खाद्य अधिकारियों पर कार्रवाई करेंगे जिनकी वजह से धान सड़ा या चूहों ने खा लिया?”

खाद्य मंत्री ने जवाब में बताया कि सक्ती जिले में 47.41 क्विंटल धान की खरीदी की गई थी और अब केवल 3.61 लाख क्विंटल धान का उठाव शेष है। उन्होंने सदन को आश्वासन दिया कि मार्च से पहले सभी केंद्रों से धान का उठाव सुनिश्चित कर लिया जाएगा।

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नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने भी इस चर्चा में दखल देते हुए सरकार से पूछा कि क्या विभाग के पास उन स्थानों की सूची है जहां धान की रिसाइक्लिंग की सूचना मिली है? विपक्ष का आरोप था कि रिसाइक्लिंग की आशंका के चलते धान के उठाव को रोका गया, जिसका खामियाजा किसानों और सरकारी अनाज की बर्बादी के रूप में भुगतना पड़ रहा है।

खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने स्पष्ट किया कि 17 तारीख को धान खरीदी नहीं, बल्कि कुछ स्थानों पर उठाव की प्रक्रिया रोकी गई थी ताकि रिसाइक्लिंग की जांच की जा सके।

किसानों की सुविधा के लिए लगेंगे ‘सूचना बोर्ड’

सदन की आसंदी (अध्यक्ष) ने इस दौरान हस्तक्षेप करते हुए सुझाव दिया कि धान खरीदी केंद्रों पर ऐसी जानकारी चस्पा की जानी चाहिए, जिससे किसानों को स्पष्ट पता रहे कि उन्हें कितना पैसा दिया जा रहा है और क्या प्रावधान हैं। इस पर खाद्य मंत्री ने आश्वासन दिया कि केंद्रों पर किसानों की जानकारी के लिए विशेष बोर्ड लगाए जाएंगे।

विपक्ष का वॉकआउट

अमानक चावल के मुद्दे पर दोषियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की मांग पर जब खाद्य मंत्री से संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो विपक्ष ने नाराजगी जाहिर की। विधायक रामकुमार यादव और अन्य कांग्रेसी सदस्यों ने सरकार पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।









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