केले की अच्छी पैदावार के लिए सबसे पहले खेत की तैयारी सही होना जरूरी है. गर्मियों में जब खेत खाली हों तब गहरी जुताई करा दें, ताकि मिट्टी अच्छी तरह धूप खा ले. इससे मिट्टी में छिपे कीट और बीमारी के जीवाणु भी खत्म हो जाते हैं. कई बार लगातार खाद डालने से मिट्टी में सख्त परत बन जाती है, जिसे तोड़ने के लिए गहरी जुताई करना जरूरी माना जाता है.
रामपुर के किसान मोहम्मद अकमल बताते हैं कि अगर किसान केले से ज्यादा पैदावार चाहते हैं, तो मिट्टी की सेहत पर भी ध्यान देना होगा. मई महीने में खेत में ढैंचा बोना फायदेमंद रहता है. जब जुलाई में केले की रोपाई करनी हो तो उससे पहले ढैंचे को खेत में मिला दें. इससे मिट्टी में जैविक तत्व बढ़ जाते हैं और जमीन नरम रहती है. ऐसी मिट्टी में केले के पौधे तेजी से बढ़ते हैं और जड़ें भी मजबूत बनती हैं.
केले की खेती में पौध का चुनाव बहुत मायने रखता है. हमेशा भरोसेमंद नर्सरी से ही पौधे खरीदें. खेत में लगाने से पहले पौधों को सीधे रोपाई न करें. उन्हें 2 से 4 दिन तक शेडनेट के नीचे रख दें. इससे पौधा खेत के माहौल के हिसाब से ढल जाता है और रोपाई के बाद जल्दी बढ़ने लगता है. किसान इस छोटे से तरीके से पौधों को खराब होने से बचा सकते हैं.
नर्सरी से आए पौधे अक्सर थके हुए होते हैं और उनकी जड़ें हिल जाती हैं. ऐसे में फंगस लगने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए शेडनेट में रखते समय पौधों पर फंगीसाइड का हल्का छिड़काव करना जरूरी है. साथ ही 19:19:19 या 16:16:16 NPK घोल का छिड़काव करने से पौधे को शुरुआती पोषण मिल जाता है और वह तेजी से बढ़ने लगता है.
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जब तक पौधे शेडनेट में रखे हों तब तक उनकी देखभाल करना भी जरूरी है. दिन में तीन से चार बार हल्का पानी देते रहें, ताकि पौधे सूखने न पाएं इससे पौधों की जड़ें मजबूत रहती हैं. किसान अक्सर इस स्टेप को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन सही नमी मिलने से पौधे खेत में लगने के बाद जल्दी बढ़ते हैं और नुकसान की संभावना भी कम रहती है.
केले के पौधे को हमेशा हल्के ऊंचे बेड पर लगाना चाहिए. पौधे से पौधे की दूरी करीब 7 फीट और दूसरी दिशा में करीब 5.5 फीट रखनी चाहिए. इससे खेत में हवा और धूप आसानी से पहुंचती है. शाम करीब 5 बजे रोपाई करना बेहतर माना जाता है. क्योंकि उस समय धूप कम होती है और पौधे को गर्मी का ज्यादा असर नहीं पड़ता.
जब खेत में केले के पौधे लगा दिए जाएं तो उसी रात खेत में हल्का पानी जरूर चला दें. इससे मिट्टी पौधे की जड़ों से अच्छी तरह चिपक जाती है और पौधा जल्दी जम जाता है, लेकिन ध्यान रखें कि खेत में पानी भरकर खड़ा न रहे, ज्यादा पानी रहने से जड़ें खराब होने का खतरा रहता है. इसलिए अतिरिक्त पानी को खेत से बाहर निकाल देना चाहिए.
केले की फसल तैयार होने पर सही समय पर कटाई करना बहुत जरूरी होता है. जब केले की मोटाई करीब 32 से 33 मिलीमीटर हो जाए, तब उसकी कटाई करनी चाहिए. अगर केला ज्यादा मोटा हो जाए तो बाजार में उसका भाव कम मिलता है. ऐसे केले जल्दी खराब भी हो जाते हैं. सही समय पर कटाई करने से किसानों को अच्छी कीमत मिल सकती है.



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