कमजोर प्रश्नपत्र पर बवाल: पांचवीं बोर्ड परीक्षा को लेकर शिक्षक संघ का विरोध

कमजोर प्रश्नपत्र पर बवाल: पांचवीं बोर्ड परीक्षा को लेकर शिक्षक संघ का विरोध

रायपुर: राज्य स्तरीय केंद्रीकृत प्राथमिक परीक्षा 2026 के अंतर्गत आयोजित पांचवीं बोर्ड परीक्षा के प्रश्नपत्र की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। परीक्षार्थियों को दिए गए प्रश्न पत्र का कागज इतना कमजोर बताया जा रहा है कि कई बच्चों की कॉपियां लिखते-लिखते फट गई। विद्यार्थियों की समस्या को देखते हुए शिक्षकों ने बताया कि लिखते समय स्याही दूसरी ओर दिखाई देने लगी, जिससे अन्य प्रश्न पढ़ने में भी परेशानी हुई है।

शालेय शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ ने इस मामले को गंभीर बताते हुए प्रश्न पत्र की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। संघ के अनुसार परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण आयोजन में इस प्रकार की लापरवाही शिक्षा व्यवस्था की तैयारी सवालों के घेरे में है। कई विद्यार्थियों ने यह भी बताया कि गणित विषय के प्रश्न हल करने के लिए उत्तर लिखने की पर्याप्त जगह नहीं दी गई थी। सीमित स्थान के कारण कई बच्चे अपने उत्तर व्यवस्थित ढंग से नहीं लिख पाए। रफ कार्य के लिए भी अलग स्थान उपलब्ध नहीं कराया गया था।

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संघ के प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं जिलाध्यक्ष जितेंद्र शर्मा ने बताया कि प्रश्न पत्र में पर्यवेक्षक के हस्ताक्षर के लिए भी कोई स्थान निर्धारित नहीं किया गया था। इसके अतिरिक्त प्रश्नपत्र निर्माण में ब्लूप्रिंट की उपयोगिता पर भी सवाल उठ रहे हैं। परीक्षा के नाम को लेकर भी सरल और आम भाषा नहीं दिखी। कहीं इसे केंद्रीकृत प्राथमिक परीक्षा कहा गया, कहीं प्राथमिक पात्रता परीक्षा और कहीं प्राथमिक प्रमाण पत्र परीक्षा के रूप में बताया गया है।

जितेंद्र बताते है शिक्षकों के भीतर इस बात को लेकर भी चर्चा थी कि उत्तर पुस्तिकाओं की पैकिंग और प्रक्रिया को लेकर भी विभिन्न प्रकार के निर्देश दिए जाने से परीक्षा केंद्रों में भ्रम की स्थिति बनी रही। शिक्षक संघ का कहना है कि यदि प्राथमिक स्तर की परीक्षा में ही इस प्रकार की व्यवस्थागत कमियां सामने आती हैं तो इसका सीधा प्रभाव बच्चों और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर पड़ता है।

शालेय शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ ने मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की है। संघ का कहना है कि जब राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की बात कही जा रही है, तब इस तरह की खामियां शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंता का विषय हैं।









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