जनदर्शन में अजीबो-गरीब मामले — कहीं जिंदा महिला मृत, कहीं जमीन का नाम बदला, कलेक्टर ने दिए त्वरित जांच के निर्देश

जनदर्शन में अजीबो-गरीब मामले — कहीं जिंदा महिला मृत, कहीं जमीन का नाम बदला, कलेक्टर ने दिए त्वरित जांच के निर्देश

बिलासपुर :जिला कार्यालय का जनदर्शन इस बार महज औपचारिक सुनवाई नहीं रहा, बल्कि सीधे-सीधे सिस्टम की खामियों का आईना बनकर सामने आया। कलेक्टर संजय अग्रवाल के सामने एक-एक कर ऐसे मामले आए, जिनमें कहीं कागजों में जमीन का मालिक बदल गया, कहीं जिंदा महिला को सरकारी रिकॉर्ड में मृत कर दिया गया, तो कहीं स्कूलों की हालत शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती नजर आई।जनदर्शन में इस बार सबसे ज्यादा आवेदन राजस्व और प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े रहे, लेकिन जो मामले सामने आए, उन्होंने सीधे प्रशासनिक जवाबदेही को कठघरे में खड़ा कर दिया।

मंगला के धुरीपारा से पहुंचे पुरुषोत्तम पटेल ने अपनी पीड़ा रखते हुए बताया कि उनकी कृषि भूमि में पिता के नाम की जगह किसी और का नाम ऑनलाइन दर्ज हो गया है। एक क्लिक की गलती उनके पूरे भविष्य पर भारी पड़ सकती है। कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए।

स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा मामला भी सामने आया, जहां बेलगहना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी ने जीपीएफ की अंतिम राशि के लिए गुहार लगाई। सेवा पूरी होने के बाद भी भुगतान के लिए भटकना पड़ रहा है।

सीपत क्षेत्र के किसान संतराम और गिरधारी लाल सूर्यवंशी की शिकायत ने योजनाओं की जमीनी हकीकत उजागर की। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की सिर्फ दो किस्त मिलने के बाद भुगतान रुक गया, जबकि ई-केवाईसी की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है।

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शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर दगोरी से आए आवेदन में साफ दिखी। सरपंच मथुरा प्रसाद ने बताया कि 237 बच्चों वाले स्कूल में पानी, शौचालय और बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं। वहीं तखतपुर के विजयपुर से आई शिकायत और भी गंभीर रही, जहां शिक्षकों पर स्कूल में शराब पीकर आने और हंगामा करने के आरोप लगे। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के साथ सीधा अन्याय है।

जनदर्शन का सबसे चौंकाने वाला मामला तिफरा निवासी अमरिका बाई का रहा। उन्होंने बताया कि महतारी वंदन योजना की राशि अचानक बंद हो गई, कारण यह कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत दर्शा दिया गया है। जिंदा होते हुए भी सिस्टम ने उन्हें कागजों में खत्म कर दिया।

वहीं सकरी के अशोक कुमार धुरी ने एक अलग तरह की परेशानी रखी—उनके नाम पर फर्जी केसीसी लोन निकाल लिया गया। उन्होंने बैंक अधिकारियों और अज्ञात लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

जनदर्शन में स्वास्थ्य सेवाओं पर भी गंभीर आरोप लगे। आजाद नगर के शैलेन्द्र सिंह ठाकुर ने नेहरू नगर स्थित श्री राम केयर अस्पताल के खिलाफ शिकायत करते हुए बताया कि आयुष्मान योजना के मरीजों के साथ दुर्व्यवहार होता है, अस्पताल परिसर में गंदगी है और भवन में अवैध निर्माण भी किया गया है।

इन तमाम मामलों के बीच कलेक्टर संजय अग्रवाल ने संबंधित अधिकारियों को त्वरित जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए। जनदर्शन की यह तस्वीर साफ करती है कि शिकायतें सिर्फ कागजों में नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जद्दोजहद का हिस्सा हैं।

यह जनदर्शन एक बात स्पष्ट कर गया—समस्याएं अलग-अलग हैं, लेकिन जड़ एक ही है… सिस्टम की सुस्ती और जवाबदेही की कमी।









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