अश्विन ने गंभीर की तारीफ में बांधे पुल, कहा—भारतीय क्रिकेट सीमित नहीं; संन्यास पर किया खुलासा

अश्विन ने गंभीर की तारीफ में बांधे पुल, कहा—भारतीय क्रिकेट सीमित नहीं; संन्यास पर किया खुलासा

भारत की मेंस क्रिकेट टीम ने पिछले 2 साल में ICC की 2 बड़ी ट्रॉफियां जीत ली हैं. गौतम गंभीर के लिए बतौर कोच यह खास उपलब्धियां हैं. गंभीर के कोच बनने के बाद भारतीय क्रिकेट में सबसे बड़ा बदलाव दिखा है कि टीम फर्स्ट की सोच.

टी20 विश्व कप जीतने के बाद गंभीर और खिलाड़ियों ने खुलासा भी किया है कि पिछले डेढ़ साल से इसी बात पर जोर दिया गया है कि पर्सनल अचीवमेंट नहीं बल्कि 'टीम-फर्स्ट' के माइंडसेट के साथ मैदान पर उतरना है. जब टीम इंडिया ने टी20 विश्व कप 2026 जीता तो उसमें किसी एक खिलाड़ी का नहीं बल्कि पूरी टीम का योगदान रहा.

अब भारतीय क्रिकेट के दिग्गज ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर के 'टीम-फर्स्ट' रवैये की खुलकर सराहना की है. आर अश्विन का मानना है कि गंभीर की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे व्यक्तिगत रिकॉर्ड या नाम के बजाय पूरी टीम की सामूहिक सफलता को प्राथमिकता देते हैं. अश्विन ने अपने अंतरराष्ट्रीय संन्यास को लेकर भी एक बड़ा खुलासा किया है.

गंभीर की तारीफ में क्या बोले अश्विन?

अश्विन ने रेवस्पोर्ट्ज कॉन्क्लेव में कहा 'मुझे गौतम गंभीर पसंद हैं और कई लोगों की उनके बारे में अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन वह ऐसे इंसान हैं, जो हमेशा टीम को खिलाड़ियों से ऊपर रखते हैं. वह व्यक्तिगत खिलाड़ियों को नहीं, बल्कि पूरी टीम को श्रेय देते हैं और यही बात मुझे सबसे ज्यादा पसंद है.'

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टी20 वर्ल्ड कप जीत के बाद भी गंभीर ने किसी एक खिलाड़ी की तारीफ करने के बजाय टीम के सामूहिक प्रदर्शन पर जोर दिया था. अश्विन भी गंभीर की इस सोच से सहमत नजर आए. उन्होंने साफ कहा,
'भारतीय क्रिकेट सिर्फ कुछ खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है, इससे कहीं ज्यादा है.'

खुद के संन्यास पर क्या बोले अश्विन?

अपने संन्यास के बारे में अश्विन ने बड़ा खुलासा किया. उन्होंने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी 2024-25 के दौरान अचानक अपने अंतरराष्ट्रीय करियर को अलविदा कह दिया था. पर्थ टेस्ट से बाहर रखे जाने के बाद अश्विन को यह एहसास हो गया था कि अब टीम इंडिया बदलाव की ओर बढ़ रही है और वॉशिंगटन सुंदर जैसे युवाओं के लिए जगह बनाने का समय आ गया है.

अश्विन ने बताया कि जब वॉशिंगटन सुंदर को उनसे पहले मौका मिला, तो उन्हें महसूस हुआ कि टीम अब एक नई दिशा में आगे बढ़ रही है. उस दौर को याद करते हुए अश्विन ने माना कि पर्थ टेस्ट उनके लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जहां उन्हें साफ हो गया था कि टेस्ट टीम में उनकी भूमिका अब खत्म होने की कगार पर है. इसलिए उन्होंने अचानक संन्यास लेने का फैसला लिया.









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