बंगाल कांग्रेस की धीमी चाल: उम्मीदवार चयन में देरी पर सियासी हलचल

बंगाल कांग्रेस की धीमी चाल: उम्मीदवार चयन में देरी पर सियासी हलचल

कोलकाता : बंगाल विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद जहां भाजपा, वाममोर्चा और तृणमूल कांग्रेस ने तेजी दिखाते हुए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी, वहीं कांग्रेस अब तक असमंजस की स्थिति में नजर आ रही है।चुनावी बिगुल बजने के तीन दिन बाद भी कांग्रेस की ओर से प्रत्याशियों की घोषणा न होना पार्टी की आंतरिक कमजोरी और रणनीतिक भ्रम को उजागर करता है।

प्रदेश नेतृत्व, खासकर शुभंकर सरकार, पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि कांग्रेस इस बार अकेले चुनाव लड़ेगी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि संगठनात्मक ढांचा कमजोर है और कार्यकर्ताओं में उत्साह की कमी साफ दिख रही है।

पिछले चुनाव में वाममोर्चा और इंडियन सेक्युलर फ्रंट के साथ गठबंधन के बावजूद खाता न खुलना भी पार्टी के आत्मविश्वास पर असर डाल चुका है। पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी का बयान कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान को सामने लाता है।

उन्होंने सार्वजनिक तौर पर ममता बनर्जी की प्रशंसा करते हुए कांग्रेस-तृणमूल गठबंधन की वकालत की। ¨सघवी का यह भी कहना कि सही आंकड़े पर गठबंधन ही एकमात्र विकल्प है, इस बात का संकेत है कि पार्टी के भीतर रणनीति को लेकर एकमत नहीं है।

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की देरी के पीछे तीन बड़े कारण हैं, पहला- गठबंधन बनाम अकेले लड़ने की दुविधा; दूसरा- मजबूत और जिताऊ उम्मीदवारों की कमी और तीसरा- केंद्रीय नेतृत्व का अंतिम निर्णय लेने में विलंब।

इसके अलावा, बंगाल में पार्टी का सीमित जनाधार और संसाधनों की कमी भी निर्णय प्रक्रिया को धीमा कर रही है। वर्तमान स्थिति यह है कि कांग्रेस के पास राज्य में सिर्फ एक लोकसभा सीट है, जो मालदा क्षेत्र से जुड़ी है। ऐसे में पार्टी के सामने अस्तित्व बचाने की चुनौती है।

26 साल बाद विधानसभा में वापसी की तैयारी में अधीर बहरमपुर के राबिनहुड कहे जाने वाले अधीर रंजन चौधरी एक बार फिर राज्य की सियासत में सक्रिय भूमिका निभाते नजर आ सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस उन्हें बहरमपुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाने पर विचार कर रही है। 1996 में विधायक रहने के बाद अधीर ने 1999 से 2024 तक लगातार लोकसभा में बहरमपुर का प्रतिनिधित्व किया।

2024 में तृणमूल उम्मीदवार यूसुफ पठान से हार के बाद अब पार्टी उन्हें राज्य की राजनीति में उतारने की रणनीति बना रही है। यदि अधीर चुनाव मैदान में उतरते हैं तो बहरमपुर सीट पर भाजपा, तृणमूल और कांग्रेस के बीच हाई-प्रोफाइल त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है।









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