डंडे, जाल और मचान का कमाल, किसान ने अपनाई नई तकनीक से बढ़ाई आय

डंडे, जाल और मचान का कमाल, किसान ने अपनाई नई तकनीक से बढ़ाई आय

खेती के विभिन्न तरीकों में से एक मचान विधि भी है. जो बेहद कारगर साबित हो रही है. जिससे किसान मालामाल हो रहे है. बहराइच जिले के किसान रंजीत सिंह लम्बे समय से मचान विधि से कुंदरू की खेती कर रहे है. इस विधि से सब्जियां खराब नहीं होती और उत्पादन भी अधिक होता है. इस विधि में डंडे और जाल का उपयोग होता है. आइए जानते है कैसे…

मचान विधि बनाना बेहद आसान है. एक बीघा के लिए लगभग 300 से 350 डंडे लगते है. जाल के लिए लगभग 6 किलो रेशम के धागे की जरूरत होती है. इन डंडों को लाइन में गाड़कर इनके पास कद्दू वर्गीय सब्जियों के बीज बो दिए जाते है. पौधे निकलने के बाद वे इन्हीं डंडों के सहारे जाल पर चढ़ते और फैलते है. इस प्रकार मचान विधि से खेती करना संभव हो पाता है.

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मचान विधि की तैयारी में लागत!
एक बीघा में मचान विधि की लागत लगभग 4000 से 5000 रुपये आती है. बहराइच के रंजीत सिंह पिछले 10 वर्षों से कुंदरू की खेती कर रहे है. कुंदरू की बाजार में अच्छी मांग होती है और यह आसानी से बिक जाती है. कुंदरू की सब्जी लोगों को पसंद आती है और यह स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होती है. इसलिए इसकी मांग बनी रहती है और किसानों को बेचने में परेशानी नहीं होती.

लागत और मुनाफा!
कुंदरू के सीजन में अच्छा मुनाफा होता है, क्योंकि इस दौरान इसका मंडी भाव तेजी से बढ़ता है. एक बीघा में 4000 से 5000 रुपये की लागत आती है और मुनाफा 25000 से 30000 रुपये तक हो जाता है. इस विधि से सब्जियां खराब नहीं होती और उनके आकार भी बड़े होते है. रोग भी कम लगते है. रंजीत ने मचान विधि के साथ बीच में मेड़ भी बनाई है, जिससे खाद और पानी देना आसान हो जाता है.

 









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