गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है और बढ़ते तापमान के साथ ही गर्मी से होने वाली समस्याएं भी शुरू हो चुकी है। मौसम में अचानक होने वाला बदलाव कई समस्याओं का कारण बनता है, जिसमें से एक माइग्रेन भी है।
बदलता मौसम माइग्रेन के मरीजों के लिए मुसीबत बन सकता है। अक्सर देखा जाता है कि सुबह सुहावनी ठंड होती है और दोपहर होते-होते तेज गर्मी पड़ने लगती है। तापमान का यह उतार-चढ़ाव हमारे शरीर के आंतरिक संतुलन को बिगाड़ देता है, जिससे सिरदर्द शुरू हो जाता है।
क्यों बढ़ता है सिरदर्द?
मैक्स हॉस्पिटल (द्वारका) के न्यूरोलॉजी विभाग के हेड डॉ. आनंद कुमार सक्सेना बताते हैं कि इसका सबसे बड़ा कारण हमारे शरीर की संवेदनशीलता है। सुबह की ठंड की वजह से शरीर की नसें सिकुड़ती हैं और दोपहर की गर्मी उन्हें अचानक फैला देती है।
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नसों में होने वाला यह तेज बदलाव ही माइग्रेन के दर्द को न्योता देता है। इसके अलावा, गर्मी बढ़ने से शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) होने लगती है, जो माइग्रेन का एक जाना-माना कारण है। उमस और बढ़ता तापमान व्यक्ति को थका देता है, जिससे चिड़चिड़ापन बढ़ता है और नींद भी पूरी नहीं हो पाती।
बचाव के आसान तरीके:
डॉक्टर ने माइग्रेन के असर को कम करने के लिए कुछ छोटी मगर जरूरी बातों का ध्यान रखने की सलाह दी, जो निम्न हैं:
यह भी रखें ध्यान
डॉक्टर ने यह भी सलाह दी कि अगर माइग्रेन का दर्द बार-बार हो रहा है या असहनीय है, तो घरेलू नुस्खों के भरोसे न रहें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। अपनी जीवनशैली में थोड़ा-सा बदलाव करके आप इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकते हैं।



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