रायगढ़ : रायगढ़ में अब बेरोजगार भूमाफियाओं को रोजगार देने के लिए अलग तरह की योजना चलाई जा रही है। उनको सरकारी जमीनें और कोटवारी जमीनें बेचने की खुली छूट दी जा रही है ताकि वे परिवार का पालन-पोषण कर सकें। बड़ी सफाई से गढ़उमरिया में सरकारी जमीन और बांजीनपाली में कोटवारी जमीन टुकड़ों में बेच दी गई। राजस्व अमला केवल तमाशबीन बनकर देखता रहा।स्वरोजगार के अवसर हर क्षेत्र में हैं। रायगढ़ में यदि कोई धंधा सबसे ज्यादा तेजी से फला-फूला है तो वह जमीनों का कारोबार ही है। जमीन सरकारी हो या निजी, बड़ी आसानी से प्लॉट काटकर बेचे जा सकते हैं। राजस्व अमला भी खुलकर इसमें मदद करेगा।
सरकार की फ्लैगशिप योजना की तरह सरकारी जमीनें और आवंटन जमीनें बिकवाई जा रही हैं। सहदेवपाली, छातामुड़ा, गढ़उमरिया, सांगीतराई, अमलीभौना, अतरमुड़ा, कौहाकुंडा, बोईरदादर, संबलपुरी सभी जगहों पर सरकारी जमीनें बेची जा चुकी हैं। जहां बेच नहीं सके, वहां नक्शे में हेराफेरी करके निजी जमीन में दबा दी गई। अब जो मामला आया है, उसमें कई नए खुलासे हो रहे हैं। संस्कार स्कूल पुलिया के आगे रोड के दोनों तरफ की जमीनों पर अतिक्रमण हो चुका है। कुछ में मकान बन चुके हैं तो कुछ में बन रहे हैं। इससे बेखबर राजस्व विभाग नींद में है।
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दाहिनी ओर रायगढ़ तहसील का बांजीनपाली आता है। यहां करीब 11 एकड़ कोटवारी जमीन है। इसमें से दो-तीन एकड़ पर 45 मकान बन चुके हैं और आगे की तैयारी भी चल रही है। मजे की बात यह है कि कुछ लोगों ने मकान बनाकर किराए पर भी दे दिया है। कोटवार को खेती करने के लिए दी गई जमीन पर प्लॉट काटकर बेच दिए गए। खसरा नंबर 204, 220, 221, 222, 226/2, 229, 231, 234/4, 235, 85, 96, 99 कुल रकबा 4.182 हे. है। यह पूरी जमीन बांजीनपाली की ग्राम नौकर सेवा भूमि है।
सेंट्रल वेयर हाउस की जमीन तक पहुंचा अतिक्रमण
रोड के दूसरी तरफ बह रहा पुराना नाला बहुत जल्द जमीन से गायब हो जाएगा। जिस गति से यहां नाला किनारे कॉलम खड़ा करके मकान बनाए जा रहे हैं, उसे रोक पाना किसी के बस की बात नहीं है। पुल पर खड़ा होकर देखें तो दूर-दूर तक अवैध कब्जे ही दिखते हैं। यहां खनं 16/1 रकबा 1.1870 हे. शासकीय भूमि है। इस पर अतिक्रमण हो चुका है। आजू-बाजू की दूसरी जमीनों पर भी निर्माण शुरू हो चुका है। यहीं पर शासकीय भूमि खनं 97/1 रकबा 2.0070 हे. पर भी अवैध कब्जे होने लगे हैं। सेंट्रल वेयर हाउस कॉर्पोरेशन को आवंटित भूमि 97/2 रकबा 2.0190 हे. का कुछ हिस्सा भी अतिक्रमण की जद में आ चुका है।
पूर्व में चला है प्रकरण
ऐसा भी नहीं है कि राजस्व विभाग को इसकी जानकारी नहीं है। लेकिन जो प्रक्रिया विभाग में चलती है, उससे भूमाफियाओं को ही ताकत मिल रही है। महीनों तक नोटिस और उसका जवाब लिया जाता है। इस बीच निर्माण चलता रहता है। पटवारी प्रतिवेदन में अवैध कब्जा प्रमाणित होने के बाद भी सख्त कार्रवाई नहीं होती। जब तक तहसील न्यायालय में आदेश होता है, तब तक दोगुनी संख्या में मकान बन जाते हैं। बांजीनपाली और गढ़उमरिया दोनों मामलों में प्रतिवेदन सौंपा गया था।



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