आलू-सरसों के बाद खाली पड़े खेतों में करें यह खेती, बंपर होगी पैदावार, कम समय में बन जाएंगे मालामाल

आलू-सरसों के बाद खाली पड़े खेतों में करें यह खेती, बंपर होगी पैदावार, कम समय में बन जाएंगे मालामाल

आलू की खुदाई और सरसों की कटाई के बाद खाली हुए खेतों में किसान हरी मिर्च की फसल उगा सकते हैं. हरी मिर्च की फसल किसानों को कम दिनों में अच्छा मुनाफा देती है. हरी मिर्च की मांग भी बाजार में लगातार बनी रहती है. शाहजहांपुर के किसानों के लिए मिर्च की खेती को लेकर एक्सपर्ट ने महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए हैं. उन्होंने बताया कि मिर्च की बेहतर उपज लेने के लिए वैज्ञानिक विधियों का पालन करना जरूरी है. नर्सरी में तैयार 5 से 6 सप्ताह पुराने पौधों की रोपाई के लिए यह समय उपयुक्त है. मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने से लेकर सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण का विशेष ध्यान रखें. जिससे किसान अपनी पैदावार और आय दोनों बढ़ा सकें.

जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार पाठक ने बताया कि हरी मिर्च की अच्छी पैदावार के लिए किसानों को पांच से छह सप्ताह पुरानी पौध की रोपाई करनी चाहिए. खेत की जुताई के समय 20 से 25 टन अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद डालें. साथ ही, मेड़ बनाकर रोपाई करें, जिससे जल प्रबंधन में आसानी होती है, और अच्छी उपज मिलती है. संतुलित उर्वरक प्रबंधन, जैसे कि नाइट्रोजन, पोटाश और फास्फोरस का सही मात्रा में प्रयोग, पौधों के स्वास्थ्य और फलों की गुणवत्ता के लिए अत्यंत आवश्यक है. ध्यान रखें कि हमेशा उन्नत किस्म का ही चयन करें जोकि रोग प्रतिरोधी हों और अच्छा उत्पादन देने के लिए जानी जाती हों.

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खेत की तैयारी और उर्वरक प्रबंधन

मिर्च की खेती के लिए खेत की गहरी जुताई बहुत ज़रूरी है. अंतिम जुताई के समय प्रति हेक्टेयर 20 से 25 टन गोबर की खाद मिलानी चाहिए. इसके अलावा, संतुलित मात्रा में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करें, लगभग 100-120 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम पोटाश और 60-80 किलोग्राम फास्फोरस की आवश्यकता होती है. रोपाई से पहले नाइट्रोजन की आधी मात्रा और पोटाश व फास्फोरस की पूरी मात्रा खेत में मिला देनी चाहिए.

रोपाई की उन्नत विधि और सिंचाई

डॉ. पुनीत कुमार पाठक ने किसानों को ‘रिज’ यानी मेड़ बनाकर रोपाई करने की सलाह दी है. इस विधि से सिंचाई करना सरल हो जाता है और पौधों की जड़ों को पर्याप्त हवा मिलती है. रोपाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई कर देनी चाहिए. इसके बाद, मौसम और मिट्टी की नमी को देखते हुए प्रत्येक 8 से 15 दिनों के अंतराल पर आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहना चाहिए, ताकि पौधों का विकास निरंतर होता रहे.

खरपतवार और फसल की देखभाल

मिर्च की फसल को स्वस्थ रखने के लिए खेत को खरपतवार मुक्त रखना बहुत ज़रूरी है. खरपतवार न केवल पोषक तत्वों को सोख लेते हैं, बल्कि कीटों और रोगों को भी आमंत्रित करते हैं. इसके लिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करते रहें. नियमित देखभाल और वैज्ञानिक सलाह का पालन करने से किसान मिर्च की बंपर पैदावार ले सकते हैं, जो उनकी आर्थिक स्थिति को मज़बूत करने में सहायक सिद्ध होगा.

 









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