नई दिल्ली: अमेरिका के एफ-35 फाइटर जेट को दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में एक माना जाता है और ये दुनिया में सबसे ज्यादा देशों में इस्तेमाल होने वाला पांचवी पीढ़ी का विमान है। ईरान ने इसे मार गिराने का दावा किया है। इससे पहले किसी भी युद्ध में इस लड़ाकू विमान को हिट नहीं किया गया है। आइये जानते हैं कि एफ-35 को दुनिया का सबसे ताकतवर लड़ाकू विमान क्यों माना जाता है।
एफ-35 के खास फीचर्स
स्टेल्थ तकनीक
सेंसर फ्यूजन
यह भारी सुरक्षा वाले एयरस्पेस में भी गहराई तक आपरेट कर सकता है। यानी इसे ट्रैक करना या निशाना बनाना बेहद मुश्किल माना जाता है। इसकी एक खासियत इसका 'सेंसर फ्यूजन' है।
युद्ध के मैदान की रियल टाइम तस्वीर
ये सिर्फ डाटा इकट्ठा नहीं करता, बल्कि रडार, इंफ्रारेड सेंसर, सेटेलाइट और अन्य प्लेटफार्म्स से मिली जानकारी को जोड़कर युद्ध के मैदान की रियल-टाइम तस्वीर दिखाता है। इससे पायलट दुश्मन को पहले देख सकता है और हमला भी पहले कर सकता है।
डाटा सेंट्रिक वारफेयर
ये एक बड़े डिजिटल काम्बेट नेटवर्क का हिस्सा बनकर काम करता है। इस से इसकी क्षमता काफी बढ़ जाती है।
हथियार
मिसाइल और बम लगाने के लिए चार इंटरनल और छह बाहरी हार्डप्वाइंट्स हैं। एयर टू एयर, एयर टू ग्राउंड मिसाइलें और बम ले सकता है।
विमान के हैं तीन वैरिएंट
इसलिए खास है एफ-35पर हमला
एफ-35 लड़ाकू विमान अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की हवाई शक्ति की रीढ़ माना जाता है। इसके एक विमान की कीमत 100 मिलियन डालर से ज्यादा है। एफ-35 दुनिया का सबसे व्यापक रूप से तैनात पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है।
इसकी स्टेल्थ यानी छिपकर उड़ने की क्षमता, एडवांस सेंसर और नेटवर्क आधारित युद्ध क्षमताएं सबसे अलग और खास बनाती हैं। इस खासतौर पर रडार की पकड़ से बचने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे यह भारी सुरक्षा वाले हवाई क्षेत्रों के अंदर तक जाकर भी काम कर सकता है।
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ईरान ने ऐसे मार गिराया लड़ाकू विमान
एफ-35 की स्टेल्थ क्षमता मुख्य रूप से रडार-आधारित पहचान प्रणालियों को विफल करने के लिए तैयार की गई है। इसका खास आकार रेडियो-आवृत्ति उत्सर्जन को बिखेर देता है और इस पर लगी कोटिंग आवृत्ति को अवशोषित करती है। लेकिन यह अपने हीट सिग्नेचर को पूरी तरह से नष्ट नहीं कर सकता। ईरान ने ऐसे वायु रक्षा तंत्र विकसित किए हैं जो विमानों को निशाना बनाने के लिए रडार के बजाय पैसिव इन्फ्रारेड सेंसर का उपयोग करते हैं।
यह तरीका यमन में ईरान समर्थित हाउती विद्रोहियों द्वारा उपयोग किए जाने पर पहले ही प्रभावी साबित हो चुकी है। पैसिव सिस्टम विशेष रूप से खतरनाक होती हैं क्योंकि वे स्वयं कोई रेडियो संकेत उत्सर्जित नहीं करती हैं। विमान में लगा रडार-वार्निंग रिसीवर आने वाले रडार उत्सर्जन का पता लगाता है, वहीं पैसिव इन्फ्रारेड ट्रैकर के मामले में यह आने वाले हमले को लेकर कोई चेतावनी नहीं देता है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने विमान पर एक लोइटरिंग म्यूनिशन 358 मिसाइल के जरिये हमला किया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हाउती विद्रोही भी एफ 35 विमानों को निशाना बना चुके हैं। हालांकि अमेरिका ने इन दावों की कभी पुष्टि नहीं की है।



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