सरकार की सौगात: किसानों को मुफ्त वर्मी बेड, ऐसे उठाएं लाभ

सरकार की सौगात: किसानों को मुफ्त वर्मी बेड, ऐसे उठाएं लाभ

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. मुख्यमंत्री औद्यानिक कृषि विकास योजना के तहत किसानों को निशुल्क वर्मी बेड और केंचुआ उपलब्ध कराया जा रहा है. दरअसल, इस योजना का मुख्य उद्देश्य मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना और रसायनों के प्रयोग को कम करना है. डॉ. पुनीत कुमार पाठक ने किसानों से इस लाभकारी योजना का लाभ उठाने की अपील की है. उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और खेती की लागत कम करने में भी सहायक सिद्ध होगी.

जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार पाठक ने बताया कि जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विभाग द्वारा किसानों को निशुल्क वर्मी बेड बांटे जा रहे हैं. उन्होंने कहा, हमारे पास वर्तमान में 10 यूनिट वर्मी बेड उपलब्ध हैं, जो ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर आवंटित किए जाएंगे. उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत किसानों को वर्मी बेड के साथ-साथ केंचुआ भी मुफ्त दिया जाएगा. इच्छुक किसानों से अनुरोध किया है कि वे जल्द से जल्द आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना पंजीकरण कराएं ताकि सीमित स्टॉक का लाभ समय रहते प्राप्त किया जा सके.

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आवेदन की प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज

इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज लेकर उद्यान विभाग के कार्यालय पहुंचना होगा। पंजीकरण के लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक की फोटोकॉपी, खतौनी और दो पासपोर्ट साइज फोटो जरूरी हैं. डॉ. पुनीत कुमार पाठक ने बताया कि दस्तावेजों के सत्यापन के बाद किसानों को वर्मी बेड आवंटित कर दिए जाएंगे. यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और किसानों की सुविधा के लिए इसे सरल बनाया गया है ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें.

जैविक खेती का महत्व और सरकारी सहायता

मुख्यमंत्री औद्यानिक कृषि विकास योजना का लक्ष्य पारंपरिक रासायनिक खेती से हटकर जैविक तकनीक को अपनाना है. वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग से न केवल फसलों की गुणवत्ता सुधरती है, बल्कि भूमि का स्वास्थ्य भी लंबे समय तक बना रहता है. सरकार द्वारा निशुल्क वर्मी बेड और केंचुआ उपलब्ध कराना उन लघु और सीमांत किसानों के लिए एक बड़ी राहत है, जो जैविक खाद खरीदने में असमर्थ थे. इससे किसानों की खाद पर होने वाली निर्भरता कम होगी और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे.

‘पहले आओ-पहले पाओ’ की नीति

जिला उद्यान अधिकारी ने जोर देकर कहा कि फिलहाल विभाग के पास 10 यूनिट वर्मी बेड ही उपलब्ध हैं. सीमित स्टॉक होने के कारण इसका वितरण ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के तहत किया जाएगा. जो किसान सबसे पहले पंजीकरण कराएंगे, उन्हें ही प्राथमिकता दी जाएगी.

 









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