गन्ने की कटाई के साथ ही अगली फसल यानी पेड़ी की नींव पड़ जाती है. कम लागत और कम समय में बेहतर मुनाफे के लिए पेड़ी प्रबंधन बेहद जरूरी है. कृषि एक्सपर्ट डॉ. संजीव कुमार पाठक बताते हैं कि कटाई के तुरंत बाद खेत से सूखी पत्तियां हटा दें. अगर ठूंठ जमीन से ऊपर रह गए हैं, तो ठूंठ छंटाई करें. अगर किसान वैज्ञानिक तरीक अपनाएं तो पेड़ी की पैदावार मुख्य फसल के बराबर या उससे भी अधिक ली जा सकती है.
पेड़ी की अच्छी शुरुआत के लिए गन्ने की कटाई जमीन की सतह से सटाकर करनी चाहिए. अगर ऊपर से कटाई की गई तो ठूंठों से निकलने वाले कल्ले कमजोर होंगे. ध्यान रखें कि कटाई धारदार औजार से हो ताकि ठूंठ फटने न पाएं. जनवरी से मार्च के बीच ली गई पेड़ी सबसे सफल रहती है क्योंकि तापमान कल्ले निकलने के लिए अनुकूल होता है.
शाहजहांपुर के कृषि एक्सपर्ट डॉ. संजीव कुमार पाठक बताते हैं कि कटाई के तुरंत बाद खेत से सूखी पत्तियां हटा दें या उन्हें कतारों के बीच बिछा दें. अगर ठूंठ जमीन से ऊपर रह गए हैं, तो ठूंठ छंटाई जरूर करें. इससे जमीन के नीचे की सुप्त कल्लों को फूटने का मौका मिलता है. इसके साथ ही, खेत की मेड़ों और खरपतवारों की सफाई करें ताकि कीटों का प्रभाव कम हो सके.
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पेड़ी में अक्सर कुछ जगहों पर जमाव नहीं होता, जिससे पैदावार घट जाती है. खेत में जहां भी 45 सेमी से अधिक का खाली स्थान दिखे, वहां 'गैप फिलिंग' करें. इसके लिए पहले से तैयार STP विधि से पौध या अंकुरित टुकड़ों का प्रयोग करें. खाली जगहों को भरने से गन्ने की संख्या बनी रहती है और खेत का पूर्ण उपयोग होता है.
पेड़ी की फसल को मुख्य फसल की तुलना में 25% अधिक नाइट्रोजन की जरूरत होती है. कटाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई के साथ यूरिया, डीएपी और पोटाश का संतुलित मिश्रण दें. क्योंकि पेड़ी में जड़ें पुरानी होती हैं, इसलिए उर्वरकों को सीधे ठूंठों के पास डालें. मिट्टी की जांच के आधार पर जिंक सल्फेट और सल्फर का प्रयोग भी काफी लाभदायक होगा.
शुरुआती अवस्था में मिट्टी में नमी बनाए रखना जरूरी है ताकि जमाव बेहतर हो. पहली सिंचाई कटाई के 15-20 दिनों के भीतर कर देनी चाहिए. ध्यान रखें कि खेत में पानी जमा न हो, क्योंकि जलभराव से जड़ें सड़ सकती हैं. गर्मियों के दौरान सिंचाई का अंतराल 10-12 दिन रखें और मल्चिंग का सहारा लें ताकि नमी बरकरार रहे.
पेड़ी में खरपतवार तेजी से पनपते हैं, जो पोषक तत्वों को सोख लेते हैं. शुरुआती 60-90 दिनों तक खेत में खरपतवार न उगने दें. कीटों से बचाव के लिए, विशेषकर कंसुआ (Shoot Borer) और दीमक के नियंत्रण के लिए कीटनाशक का छिड़काव करें. पत्ती बिछाने की तकनीक न केवल खरपतवार रोकती है, बल्कि मिट्टी के जैविक कार्बन को बढ़ाने में भी मदद करती है.
कल्ले निकलने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, पौधों की जड़ों पर मिट्टी जरूर चढ़ाएं. इससे पौधों को सहारा मिलता है और पोषक तत्व जड़ों तक बेहतर पहुंचते हैं. मानसून शुरू होने से पहले और फसल की ऊंचाई बढ़ने पर गन्ने की बंधाई करना न भूलें. अच्छी बंधाई फसल को गिरने से बचाती है, जिससे गन्ने की मोटाई और चीनी की मात्रा प्रभावित नहीं होती है.



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