ब्रसेल्स: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक नई यूरोपीय रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस और चीन, ईरान को इस तरह समर्थन दे रहे हैं कि सीधे तौर पर अमेरिका से टकराव भी न हो और क्षेत्र में अपना प्रभाव भी बढ़ता रहे।रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों का मुख्य उद्देश्य दुनिया में अमेरिका की एकछत्र शक्ति को कमजोर करना है।
द यूरोपियन टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान को मिल रहा यह समर्थन किसी वैचारिक एकजुटता से अधिक रणनीतिक हितों से जुड़ा है। रूस, जो इस समय यूक्रेन युद्ध के कारण पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, ईरान को ऐसे साझेदार के रूप में देखता है जो अमेरिकी दबाव के खिलाफ खड़ा है।वहीं, चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों की सुरक्षा और क्षेत्र में आर्थिक पहुंच बढ़ाने के लिए ईरान के साथ संबंध मजबूत रख रहा है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन खाड़ी क्षेत्र में अपने आर्थिक गलियारे और निवेश को मजबूत करना चाहता है, जबकि रूस सैन्य सहयोग के जरिए अपनी उपस्थिति बनाए रखना चाहता है। दोनों देशों को यह भी लाभ है कि ईरान सीधे संघर्ष की कीमत खुद चुका रहा है, जबकि उन्हें परोक्ष लाभ मिल रहा है।
विश्लेषण के अनुसार, यह केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस और चीन ऐसे देशों का समूह तैयार कर रहे हैं जो अमेरिकी प्रतिबंधों और दबाव के बावजूद स्वतंत्र रणनीति अपनाना चाहते हैं।
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि चीन ईरान के बहुत करीब दिखाई देता है तो खाड़ी के कई देश फिर से अमेरिका की ओर अधिक झुक सकते हैं। दूसरी ओर, रूस के सामने भी चुनौती है, क्योंकि उसे अपने सैन्य संसाधनों का संतुलन बनाए रखना पड़ रहा है।



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