नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बेहद सख्त चेतावनी देते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी खत्म करने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर कहा कि यदि ईरान अगले दो दिनों के भीतर बिना किसी शर्त और धमकी के इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को पूरी तरह से नहीं खोलता है, तो संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान के विभिन्न बिजली संयंत्रों को निशाना बनाकर उन्हें नष्ट कर देगा।
ईरान के सबसे बड़े बिजली संयंत्र पर होगा हमला
उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की शुरुआत ईरान के सबसे बड़े बिजली संयंत्र से की जाएगी। ट्रंप का यह बयान क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच आया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और सुरक्षा पर गहरा संकट मंडराने लगा है। राष्ट्रपति ने अपने संदेश के अंत में कड़े लहजे में लिखा कि इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद।
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पूरा हो रहा नेतन्याहू का कार्यकाल, ईरान बनेगा बड़ा मुद्दा
इजरायल में बेंजामिन नेतन्याहू की गठबंधन सरकार का चार वर्ष का कार्यकाल जल्द पूरा हो रहा है और आगामी अक्टूबर में वहां पर आम चुनाव प्रस्तावित है। एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि नेतन्याहू कुछ हफ्तों में संसद को भंग करने की सिफारिश कर जल्द चुनाव करवा सकते हैं।
लेकिन इस संभावना पर देश के युद्धों में फंसे होने की स्थिति सवाल खड़े कर रही है। गाजा और वेस्ट बैंक में तनाव बना हुआ है और छिटपुट वारदातें रोज हो रही हैं। ईरान के साथ इजरायल युद्ध में है और हिजबुल्ला के खात्मे के लिए लेबनान पर प्रतिदिन हमले कर रहा है।
हिजबुल्ला कर रहा हमला
हिजबुल्ला के लड़ाके भी जवाब में इजरायल पर रॉकेट हमले कर रहे हैं। यह स्थिति कब तक रहेगी, कहा नहीं जा सकता।
राजनीति के जानकारों का मानना है कि युद्ध के दौरान मजबूत हुई राष्ट्रवादी भावना को भुनाने के लिए नेतन्याहू जल्द चुनाव करवा सकते हैं। लेकिन लंबा खिंचता ईरान युद्ध और उससे इजरायल को होने वाला नुकसान चुनाव को प्रभावित कर सकता है।
अगर ईरान पर इजरायल विजय प्राप्त करता है और इजरायल ग्रेटर स्वरूप प्राप्त करने के लिए लेबनान की नई जमीन पर कब्जा करता है तो नेतन्याहू के लिए जल्द चुनाव करवाना फायदे का सौदा हो सकता है।
ईरान युद्ध इजरायली चुनाव का मुद्दा रहने वाला है
हर स्थिति में ईरान युद्ध इजरायली चुनाव का मुद्दा रहने वाला है। ईरान पर इजरायल की जीत की स्थिति में नेतन्याहू के खिलाफ न्यायालय में चल रहे भ्रष्टाचार के मामलों पर फैसले की मांग भी कमजोर पड़ जाएगी। वैसे नेतन्याहू को आरोपों से मुक्त करने की प्रार्थना राष्ट्रपति कार्यालय में लंबित है।



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