दुनियाभर में कई जगह ईद का त्योहार मनाया जा रहा है। यह पर्व इस्लामिक समुदाय के अहम पर्वों में से एक हैं। रमजान के पाक महीने के बाद जैसे ही आसमान में ईद का चांद नजर आता है, हर तरफ खुशियों की लहर दौड़ जाती है।
ईद का नाम सुनते ही अक्सर जहन में ढेरों लजीज पकवान का ख्याल आता है, लेकिन, क्या आपने कभी गौर किया है कि ईद की दावत हमेशा एक खास मीठे पकवान के बिना हमेशा अधूरी रहती है? जी हां, हम बात कर रहे हैं 'सेवइयां' की।
कैसे भारत पहुंची सेवई?
सेवइयां जिसे कई जगह शीर खुरमा भी कहते हैं, सिर्फ एक डिश नहीं, बल्कि सदियों पुरानी एक परंपरा है। वैसे तो इसकी शुरुआत फारस यानी आज के ईरान से मानी जाती है, लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप में आकर इसका रूप ही बदल गया।
ये भी पढ़े :मुखिया के मुखारी - पैसा सबसे ज्यादा जरुरी है
कहा जाता है कि मुगल बादशाह इसे भारत लेकर आए थे। मूल रूप से ईरानी होने की वजह से अवध के राजा के जरिए सेवई लखनऊ पहुंची और मुगलों के दौर में इसमें देसी घी, गुड़ और गुलाब की चाशनी मिलाकर इसे एक शाही पहचान दी गई।
कैसे ईद का हिस्सा बनी सेवईयां?
कहा तो यह भी जाता है कि आखिरी मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर रोजे के दौरान अपने हाथों से सेवइयां बनाया करते थे और देखते ही देखते यह ईद का अहम हिस्सा बन गई। आज भले ही इसे बनाने का तरीका थोड़ा आसान हो गया है, लेकिन सेवइयां आज भी प्यार, मेहमाननवाजी और आपसी भाईचारे का एक मीठा प्रतीक हैं।
मीठी सेवइयां बनाने की रेसिपी
अगर आप इस बार अपनी ईद की दावत में थोड़ा शाही टच देना चाहते हैं, तो इस पारंपरिक रेसिपी को जरूर ट्राई करें। इसकी खुशबू और स्वाद आपके मेहमानों का दिल जीत लेंगे।
जरूरी सामग्री
बनाने का तरीका



Comments