पाकिस्तान पर तीनहरा संकट: अर्थव्यवस्था, आतंक और सांप्रदायिक तनाव का खतरा

पाकिस्तान पर तीनहरा संकट: अर्थव्यवस्था, आतंक और सांप्रदायिक तनाव का खतरा

 नई दिल्ली : पाकिस्तान इस समय हर मोर्चे पर पिटता हुआ नजर आ रहा है चाहे वह अफगानिस्तान में चल रहा संघर्ष हो, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान का आतंकी दबाव हो या फिर डगमगाती अर्थव्यवस्था।ऐसे में सेना प्रमुख आसिम मुनीर अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने और अपनी छवि चमकाने के लिए अब एक खतरनाक खेल खेलते दिखाई दे रहे हैं पाकिस्तान में शिया और सुन्नी समुदाय के बीच टकराव भड़काने की साजिश।

आसिम मुनीर पर दबाव

सूत्रों के अनुसार, आसिम मुनीर पर इस समय जबरदस्त दबाव है। एक तरफ सीमाओं पर अस्थिरता, दूसरी तरफ आतंकी संगठनों का बढ़ता प्रभाव और ऊपर से चरमराती अर्थव्यवस्था इन सबने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर कर दिया है।

ऐसे में ध्यान भटकाने के लिए सांप्रदायिक आग भड़काना पुराना और खतरनाक हथियार बनता दिख रहा है। बताया जा रहा है कि मुनीर उसी राह पर चल रहे हैं, जिस पर कभी मुहम्मद जिया-उल-हक ने पाकिस्तान को धकेला था जहां शिया समुदाय को व्यवस्थित रूप से निशाना बनाया गया था।

आज वही रणनीति नए रूप में सामने आ रही है।शिया समुदाय के खिलाफ माहौल बनाया जा रहापश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच पाकिस्तान में शिया समुदाय के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। ईरान के समर्थन में निकलने वाली रैलियों को राष्ट्रविरोधी और सुन्नी विरोधी करार दिया जा रहा है।

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पाकिस्तान की रणनीति

हाल ही में एक कार्यक्रम में आसिम मुनीर द्वारा शियाओं को यह कहना कि अगर इतना ही प्यार है तो ईरान चले जाओ , इस बात का संकेत है कि यह केवल बयान नहीं, बल्कि सुनियोजित उकसावा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह एक सोची-समझी रणनीति है शियाओं को उकसाओ, प्रतिक्रिया आएगी और फिर पूरे देश में शिया-सुन्नी हिंसा की आग फैल जाएगी।

इससे एक तरफ जनता का ध्यान असली मुद्दों से हटेगा, वहीं दूसरी ओर सेना खुद को कानून व्यवस्था का रक्षक दिखाकर अपनी भूमिका मजबूत कर सकेगी। शिया समुदाय ने इस बयानबाजी पर गहरी नाराजगी जताई है और साफ कहा है कि उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाना न केवल अपमानजनक है, बल्कि खतरनाक भी।

उनका कहना है कि ईरान के समर्थन में आवाज उठाना कोई अपराध नहीं है।आंतरिक टकराव को निकास मार्ग के रूप में देख रहेइस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव भी छिपा हुआ है। सऊदी अरब और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच पाकिस्तान की स्थिति असहज है।

बीच में फंसे आसिम मुनीर

एक तरफ सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौते का दबाव, दूसरी तरफ देश के भीतर शिया समुदाय का ईरान के प्रति झुकाव इन दोनों के बीच फंसे आसिम मुनीर अब आंतरिक टकराव को एक निकास मार्ग के रूप में देख रहे हैं। हकीकत यह है कि पाकिस्तान के पास न तो संसाधन हैं और न ही क्षमता कि वह पश्चिम एशिया के युद्ध में खुलकर उतर सके।

लेकिन जनता को यह समझाना अब मुश्किल हो गया है, खासकर तब जब महंगाई, ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी और आर्थिक बदहाली ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है।

ऐसे में सवाल उठता है क्या अपनी छवि बचाने के लिए आसिम मुनीर अपने ही देश को सांप्रदायिक आग में झोंकने को तैयार हैं? अगर ऐसा है, तो यह केवल एक रणनीतिक गलती नहीं, बल्कि पाकिस्तान के भविष्य के साथ खतरनाक खिलवाड़ है।









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