दुनिया की लाइफलाइन पर खतरा: होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य कार्रवाई क्यों खतरनाक?

दुनिया की लाइफलाइन पर खतरा: होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य कार्रवाई क्यों खतरनाक?

नई दिल्ली :  अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, जिसके केंद्र में 'होर्मुज जलडमरूमध्य' है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। वर्तमान में यह जलमार्ग लगभग ठप है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं।

राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इसे 48 घंटों में पूरी तरह खोलने का अल्टीमेटम दिया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य बल से इसे खोलना एक 'आर्थिक और राजनीतिक बारूद के ढेर' पर बैठने जैसा है। ईरान की जवाबी चेतावनी व सैन्य जटिलताएं वॉशिंगटन के लिए इस जलमार्ग को खोलना अब केवल सैन्य लक्ष्य नहीं, बल्कि एक मजबूरी बन गया है।

क्षेत्रीय महायुद्ध को जन्म दे सकता है टकराव

न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन हवाई हमलों, समुद्री सुरंगों को हटाने और टैंकरों को सुरक्षा घेरे में निकालने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है। हालांकि, ईरान ने कड़ी चेतावनी दी है कि यदि उसके बिजली संयंत्रों पर हमला हुआ, तो वह पूरे पश्चिम एशिया में अमेरिकी हितों से जुड़े ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी और वॉटर डिसेलिनेशन (जल-शोधन) बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएगा। यह स्थिति एक क्षेत्रीय महायुद्ध को जन्म दे सकती है।

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अमेरिकी युद्धक विमानों ने ईरान के दक्षिणी तट पर मिसाइल लांचरों और ड्रोन केंद्रों को निशाना बनाया है, लेकिन ईरान की मारक क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। सबसे बड़ी चुनौती 'स्वार्म टैक्टिक्स' है, जिसमें ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड की सैकड़ों छोटी और तेज रफ्तार नावें अचानक हमला कर सुरक्षा घेरे को ध्वस्त कर सकती हैं।

समुद्री सुरंगें और खार्ग द्वीप का जोखिम

सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे घातक समस्या समुद्री सुरंगें हैं। यदि ईरान ने जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाई हैं, तो उन्हें साफ करने में हफ्तों लग सकते हैं। एक भी सफल विस्फोट पूरे व्यापारिक यातायात को अनिश्चित काल के लिए रोक सकता है।

इसके अलावा, ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र 'खार्ग द्वीप' पर कब्जा करने का विकल्प भी मेज पर है। लेकिन इस तरह के जमीनी हमले में हजारों अमेरिकी नौसैनिकों की जान जोखिम में पड़ सकती है और अमेरिका इस संघर्ष में और गहराई तक फंस सकता है।

1980 के दशक के 'टैंकर युद्ध' का अनुभव बताता है कि अमेरिकी सुरक्षा के बावजूद जहाजों को मिसाइलों और बारूदी सुरंगों से बचाना बेहद कठिन है। अंतत: होमुर्ज को जबरदस्ती खोलना एक ऐसी सैन्य उलझन है जिसका कोई आसान समाधान नहीं दिखता।









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