आज के समय में ब्रेन स्ट्रोक के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं और यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है. ब्रेन स्ट्रोक तब होता है जब दिमाग तक खून की सप्लाई अचानक रुक जाती है या किसी ब्लड वेसल के फटने से अंदर ब्लीडिंग होने लगती है, जिससे दिमाग के सेल्स डैमेज होने लगते हैं.इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, स्मोकिंग, मोटापा और खराब लाइफस्टाइल.
इसके अलावा, अधिक तनाव, शारीरिक एक्टिविटी की कमी और गलत खानपान भी इसके खतरे को बढ़ाते हैं. यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोग, दिल के मरीज, डायबिटीज के रोगी और हाई बीपी से पीड़ित लोगों को इसका खतरा ज्यादा रहता है. आजकल युवाओं में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं, जो चिंता का विषय है. आइए जानते हैं कि इसके लक्षण क्या हैं और लक्षण दिखने पर क्या करें.
क्या हैं ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण?
दिल्ली में न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. राजेश कुमार बताते हैं कि ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण अचानक सामने आते हैं और इन्हें समय रहते पहचानना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि थोड़ी सी देरी जानलेवा साबित हो सकती है. आमतौर पर शरीर के एक हिस्से में अचानक कमजोरी या सुन्नपन महसूस होना इसका मुख्य संकेत होता है. चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा पड़ जाना, मुस्कुराने में परेशानी होना या होंठ एक तरफ झुक जाना भी इसके लक्षण हो सकते हैं.
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इसके अलावा बोलने में दिक्कत, शब्दों का सही उच्चारण न कर पाना या दूसरों की बात समझने में परेशानी होना भी संकेत देता है. कई बार मरीज को अचानक तेज सिरदर्द, चक्कर आना, आंखों से धुंधला या डबल दिखना, संतुलन बिगड़ना और चलने में कठिनाई जैसी समस्याएं होने लगती हैं. हाथ या पैर को उठाने में कमजोरी महसूस होना भी एक अहम लक्षण है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर क्या करें?
अगर किसी व्यक्ति में ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण नजर आते हैं, तो तुरंत एक्शन लेना बेहद जरूरी होता है क्योंकि हर मिनट बहुत कीमती होता है. सबसे पहले मरीज को बिना देर किए नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं या तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं. मरीज को आरामदायक स्थिति में लिटाएं और उसका सिर हल्का ऊंचा रखें ताकि ब्लड फ्लो संतुलित रहे. मरीज को शांत रखें और घबराने न दें, क्योंकि तनाव स्थिति को और खराब कर सकता है.
मरीज को कुछ भी खाने या पीने के लिए न दें, क्योंकि स्ट्रोक के दौरान निगलने में परेशानी हो सकती है और यह खतरनाक साबित हो सकता है. उसके सांस लेने, नाड़ी और होश की स्थिति पर नजर बनाए रखें. जितनी जल्दी इलाज शुरू होगा, उतना ही दिमाग को कम नुकसान होगा और ठीक होने की संभावना बढ़ेगी.
क्या है बचाव और इलाज?
ब्रेन स्ट्रोक से बचाव के लिए स्वस्थ लाइफस्टाइल अपनाना बेहद जरूरी है. नियमित रूप से एक्सरसाइज करें और अपने वजन को कंट्रोल रखें. संतुलित डाइट लें, जिसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज और कम नमक व कम तेल वाली चीजें शामिल हों. धूम्रपान और शराब का सेवन बिल्कुल न करें, क्योंकि ये स्ट्रोक के जोखिम को कई गुना बढ़ाते हैं.
हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों को कंट्रोल में रखना बहुत जरूरी है, इसलिए समय-समय पर जांच कराते रहें. इलाज की बात करें तो यह स्ट्रोक के प्रकार पर निर्भर करता है. डॉक्टर दवाइयों, फिजियोथेरेपी और जरूरत पड़ने पर सर्जरी की सलाह दे सकते हैं. समय पर इलाज मिलने से मरीज की हालत में तेजी से सुधार संभव है.



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