शिवपुरी में इन दिनों एक खास सब्जी की चर्चा है. ये सब्जी किसानों की कमाई को कई गुना बढ़ा दे रही है. लोग यहां तक कह रहे कि ये सोना जैसा फायदा दे रही है. जी हां, यहां बात हो रही कलौंजी की, जिसे किसान अब ‘फायदे की फसल’ मानने लगे हैं. कम खर्च, कम मेहनत और कम समय में तैयार होने वाली यह फसल किसानों की जेब भर रही है. खास बात ये कि इस फसल को जानवर भी नुकसान नहीं पहुंचाते, जिससे जोखिम और भी कम हो जाता है. सरकार भी इस फसल की खेती में मदद कर रही है.
कम लागत, सीधा फायदा
शिवपुरी में जोराई गांव के किसान दुर्गेश धाकड़ बताते हैं कि एक बीघा में कलौंजी बोने के लिए ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ता. बीज, जुताई और हल्की देखभाल मिलाकर करीब 5 से 6 हजार रुपए में पूरी फसल तैयार हो जाती है. पानी की भी ज्यादा जरूरत नहीं होती. एक-दो सिंचाई में काम चल जाता है. यही वजह है कि छोटे और सीमांत किसान भी इसे आसानी से अपना रहे हैं. 4-5 महीने में तैयार होने वाली यह फसल कम समय में अच्छा रिटर्न दे रही है.
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जानवर भी रहते दूर, नहीं होता नुकसान
कलौंजी की खेती में सबसे बड़ी राहत ये कि इसमें आवारा जानवरों से नुकसान का डर नहीं रहता. किसान ने बताया कि इसकी गंध के कारण मवेशी इसे खाते नहीं हैं और खेत के आसपास भी ज्यादा नहीं ठहरते. जहां दूसरी फसलों में रात-रात भर पहरा देना पड़ता है, वहीं इस फसल में यह झंझट नहीं है. इससे किसानों का समय भी बचता है और मानसिक परेशानी भी कम होती है.
कम समय में तगड़ी कमाई
उत्पादन की बात करें तो एक बीघा में ढाई से तीन क्विंटल तक पैदावार मिल रही है. बाजार में दाम सही मिल जाएं तो किसान 60-70 हजार रुपए तक आसानी से कमा लेते हैं. किसान ने बताया, पहले इतनी कम लागत में इतना फायदा नहीं मिलता था, लेकिन अब कलौंजी ने कमाई का नया रास्ता खोल दिया है. यही कारण है कि धीरे-धीरे ज्यादा किसान इस खेती की ओर रुख कर रहे हैं.
मुनाफे का अच्छा विकल्प
उपसंचालक कृषि विभाग पान सिंह करोरिया ने बताया, कलौंजी की खेती किसानों के लिए मुनाफे का अच्छा विकल्प बनकर उभर रही है. इस फसल में लागत कम लगती है. समय भी ज्यादा नहीं लगता, जबकि आमदनी बेहतर मिल जाती है. उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा किसानों को नई तकनीक और फसलों के प्रति जागरूक किया जा रहा है, जिसमें कलौंजी भी शामिल है. कई किसानों को इसकी खेती के लिए प्रेरित किया गया है और इसके अच्छे परिणाम भी सामने आ रहे हैं, जिससे अन्य किसान भी इसे अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं.



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