नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा कूटनीतिक दांव खेलते हुए ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को टालने की घोषणा की है. उन्होंने अमेरिकी रक्षा विभाग को स्पष्ट निर्देश दिया है कि ईरान के ऊर्जा ढांचे और पावर प्लांट्स पर अगले पांच दिनों तक कोई हमला न किया जाए.यह निर्णय पिछले दो दिनों में दोनों देशों के बीच हुई 'बेहद सकारात्मक' बातचीत का परिणाम बताया जा रहा है. ट्रंप का मानना है कि इस पहल से क्षेत्र में जारी तनाव का स्थाई समाधान निकल सकता है.
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस महत्वपूर्ण फैसले की जानकारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' के माध्यम से दी. उन्होंने बताया कि ईरान के साथ हुई हालिया चर्चाएं काफी उत्पादक रही हैं और दोनों पक्ष विवादों को सुलझाने के लिए गंभीर नजर आ रहे हैं. ट्रंप के अनुसार यह बातचीत आने वाले पूरे सप्ताह जारी रहेगी ताकि किसी ठोस नतीजे पर पहुंचा जा सके. शांति की इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए ही उन्होंने पांच दिनों के सैन्य विराम का फैसला लिया है.
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रक्षा विभाग को मिले कड़े निर्देश
अमेरिकी प्रशासन ने सैन्य अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल कूटनीति को प्राथमिकता दी जाएगी. ट्रंप के आदेश के बाद रक्षा विभाग ने ईरानी पावर प्लांट्स और ऊर्जा केंद्रों को अपने लक्ष्यों की सूची से अस्थाई रूप से हटा दिया है. यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका के लचीले रुख को दर्शाता है जो युद्ध के बजाय बातचीत से समाधान चाहता है. राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह मोहलत केवल पांच दिनों के लिए है.
पुराने अल्टीमेटम से बदला रुख
ट्रंप की यह घोषणा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे ठीक एक दिन पहले उन्होंने ईरान को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी थी. तब राष्ट्रपति ने कहा था कि यदि 48 घंटे के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नहीं खोला गया तो ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तबाह कर दिया जाएगा. हालांकि ताजा सकारात्मक संकेतों के बाद ट्रंप ने अपने रुख में नरमी दिखाई है. यह बदलाव बताता है कि पर्दे के पीछे हुई बातचीत में कुछ महत्वपूर्ण प्रगति हुई है.
कूटनीतिक समाधान की बढ़ती उम्मीदें
हालिया घटनाक्रम से विशेषज्ञों को उम्मीद है कि अमेरिका और ईरान अब सीधे टकराव के बजाय कूटनीति का रास्ता अपना रहे हैं. ट्रंप का दावा है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को खत्म करने के लिए दोनों पक्ष अब गहन चर्चा कर रहे हैं. यह पांच दिनों का ब्रेक शांति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है. पूरी दुनिया अब इस बात का इंतजार कर रही है कि क्या यह कूटनीतिक पहल युद्ध के खतरे को हमेशा के लिए टाल पाएगी.



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