नई दिल्ली : ईरान ने अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों को ''बिना उकसावे के की गई सैन्य आक्रामकता'' करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय और अन्य वैश्विक निकायों का दरवाजा खटखटाया है।
ईरानी रेड क्रेसेंट सोसाइटी के अनुसार, तेहरान ने इस मामले में 16 औपचारिक पत्र सौंपे हैं, जिनमें इन हमलों की निंदा करने और कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है। ईरान का आरोप है कि 28 फरवरी से शुरू हुए इन हमलों में अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और जिनेवा कन्वेंशन का खुलेआम उल्लंघन किया गया है। बुनियादी ढांचे व चिकित्सा सेवाओं पर गंभीर संकट ईरानी अधिकारियों ने हमलों से हुई तबाही के चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं।
81,365 नागरिक संपत्तियों को नुकसान
आइआरसीएस के प्रमुख पीर-हुसैन कोलिवंद के मुताबिक, देश भर में 81,365 नागरिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है। इसमें चिकित्सा केंद्र, स्कूल और एम्बुलेंस शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 61,555 घर और 19,050 वाणिज्यिक इकाइयां क्षतिग्रस्त हुई हैं। राजधानी तेहरान में 24,605 आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों के साथ-साथ 498 स्कूलों और 275 स्वास्थ्य केंद्रों पर हमला हुआ है।
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ईरानी नौसेना के जहाज 'आइरिस डेना' को बनाया निशाना
ईरानी नौसेना के जहाज 'आइरिस डेना' और रेड क्रेसेंट के तीन हेलीकाप्टरों को भी निशाना बनाया गया है। ईरान की जवाबी कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति आइआरसीएस की अंतरराष्ट्रीय मामलों की उप प्रमुख रजिया अलीशवंडी ने कहा कि ईरान इस मुद्दे पर रेड क्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है। अब तक मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों पर पांच संयुक्त बयान जारी किए जा चुके हैं।
तेहरान कर रहा जवाबी हमले
दूसरी ओर, इन हवाई हमलों के जवाब में तेहरान ने भी ''व्यापक जवाबी हमले'' शुरू किए हैं। ईरान का दावा है कि उसने मिसाइलों और ड्रोनों के जरिये इजरायली क्षेत्रों और क्षेत्रीय देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य संपत्तियों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि चिकित्सा केंद्रों पर हमला इमारतों की तबाही नहीं, बल्कि मानवीय जीवन बचाने वाली जीवन रेखाओं पर हमला है।



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