भागने की तैयारी के आरोप में घिरा नारायणा टेक्नो स्कूल, खुली गड़बड़ियों की परतें

भागने की तैयारी के आरोप में घिरा नारायणा टेक्नो स्कूल, खुली गड़बड़ियों की परतें

बिलासपुर : नारायणा ई-टेक्नो स्कूल को लेकर विवाद अब सड़कों से प्रशासनिक जांच तक पहुंच गया है। युवा कांग्रेस नेताओं ने अमितेष राय की अगुवाई में कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ गंभीर आरोपों के साथ लिखित शिकायत सौंपी। कलेक्टर ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दे दिए। ज्ञापन सौंपने के बाद युवा कांग्रेस कार्यकर्ता सीधे स्कूल पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया, जिससे मामला और गरमा गया।

युवा कांग्रेस नेताओं ने अपनी शिकायत में साफ आरोप लगाया कि नेहरू नगर अमेरा रोड स्थित नारायणा ई-टेक्नो स्कूल अभिभावकों को गुमराह कर संभावित वित्तीय धोखाधड़ी की ओर बढ़ रहा है। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन अचानक पलायन की रणनीति पर काम कर रहा है, जिससे भविष्य में अभिभावकों और छात्रों को बड़ा नुकसान हो सकता है।

फीस सीधे बाहरी खातों में, जवाबदेही शून्य

शिकायत में बताया गया कि स्कूल का कोई स्वतंत्र स्थानीय खाता नहीं है। अभिभावकों से वसूली जा रही फीस सीधे बाहरी संस्थाओं—नेल्लोर और मुंबई स्थित एस्पीरा समूह—के खातों में जमा कराई जा रही है। स्थानीय स्तर पर कोई जिम्मेदार गारंटर या अधिकृत प्रतिनिधि नहीं है, जिससे पूरी वित्तीय व्यवस्था संदिग्ध नजर आ रही है।

ये भी पढ़े :मुखिया के मुखारी - पैसा सबसे ज्यादा जरुरी है 

मान्यता पर सवाल, CBSE के नाम पर वसूली!

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि स्कूल के पास वैध मान्यता नहीं है, इसके बावजूद CBSE स्कूल के नाम पर संचालन किया जा रहा है और बच्चों से मोटी फीस वसूली जा रही है। सोसाइटी पंजीयन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की भी लगातार अनदेखी की जा रही है, जिससे दस्तावेजी हेरफेर और वित्तीय दुरुपयोग की आशंका और गहरा गई है।

बिलासपुर से रायपुर-दुर्ग तक एक जैसा खेल?

नेताओं ने दावा किया कि यह मामला सिर्फ बिलासपुर तक सीमित नहीं है। रायपुर और दुर्ग-भिलाई में संचालित नारायणा टेक्नो स्कूल की शाखाओं में भी इसी तरह की मनमानी और अनियमितताएं सामने आ रही हैं। राज्य स्तर पर बिना स्पष्ट अनुमति और संरचना के स्कूल संचालन पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

एक ही छात्र, दो जगह परीक्षा? बड़ा नेटवर्क

शिकायत में सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि कुछ मामलों में एक ही छात्र को बिलासपुर और रायपुर दोनों जगह उपस्थित दिखाया जा रहा है। यदि यह सही है, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित हेरफेर का संकेत देता है। आरोप लगाया गया कि इस पूरे मामले को दबाने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी स्तर पर भी मिलीभगत हो सकती है।

डाल्फिन स्कूल’ जैसी आशंका, भविष्य दांव पर

युवा कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला पहले के चर्चित ‘डाल्फिन स्कूल’ प्रकरण जैसा रूप ले सकता है, जहां अचानक संस्थान बंद होने से अभिभावकों और छात्रों का भविष्य संकट में पड़ गया था।

जांच के आदेश, अब प्रशासन पर निगाह

प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय (K-12)
कलेक्टर द्वारा जांच के आदेश के बाद अब पूरा फोकस प्रशासनिक कार्रवाई पर है। सवाल साफ है—क्या यह सिर्फ अनियमितता है या एक संगठित वित्तीय और शैक्षणिक घोटाले की शुरुआत?









You can share this post!


Click the button below to join us / हमसे जुड़ने के लिए नीचें दिए लिंक को क्लीक करे


Related News



Comments

  • No Comments...

Leave Comments