कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) व असदुद्दीन ओवैसी की आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआइएमआइएम) के बीच बंगाल विधानसभा (विस) चुनाव के लिए गठबंधन की औपचारिक घोषणा ने कई दलों में मुस्लिम वोटों को लेकर सियासी प्रतिस्पर्धा बढ़ा दी है।
तृणमूल को डेढ़ दशक से मिलता आया है मुस्लिमों का साथ
एजेयूपी व एआइएमआइएम ने बुधवार को कोलकाता में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन कर अपने गठबंधन की घोषणा की। एजेयूपी 182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। एआइएमआइएम को कितनी सीटें दी जाएंगी, इसे लेकर बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी इसका खुलासा नहीं किया गया।
प्रश्न यह है कि हुमायूं-ओवैसी की जोड़ी बंगाल के मुस्लिमों को अपनी ओर खींचने में कितनी कारगर साबित होगी? तृणमूल को पिछले डेढ़ दशक से मुस्लिमों का साथ मिलता आ रहा है और कांग्रेस-वाममोर्चा (वामो) अपना खोया मुस्लिम वोट पाने को प्रयासरत है।
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वहीं नौशाद सिद्दीकी की पार्टी इंडियन सेक्युलर फ्रंट भी अपना गणित लगा रही है। हुमायूं 'बाबरी मस्जिद' के माध्यम से मुस्लिमों को साधने की जुगत में हैं। मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में कुछ समय पहले ही वह इसकी नींव रख चुके हैं।
यहां प्रभावी हो सकते हैं ओवैसी
ओवैसी की पार्टी का बिहार के सीमांचल (पूर्णिया, अररिया, कटिहार व किशनगंज) से लगते बंगाल के उत्तर व दक्षिण दिनाजपुर जिलों के मुस्लिम बहुल विस क्षेत्रों में प्रभाव दिख सकता है। बिहार विस चुनाव में एआइएमआइएम ने पांच सीटें जीती थीं।
ओवैसी ने कहा कि तृणमूल ने मुस्लिम वोट तो हासिल कर लिया, लेकिन इस समुदाय के लिए कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा कि उनका गठबंधन मुख्यमंत्री पद के लिए चुनाव लड़ेगा।
वहीं हुमायूं ने भी कहा कि बंगाल को मुस्लिम मुख्यमंत्री की जरुरत है। कईयों का मानना है कि इस गठबंधन का बड़ा प्रभाव न भी पड़ा, तो भी मुस्लिम वोट बैंक कुछ हद तक बंटेगा, जिससे भाजपा को फायदा होगा।
'हिमायती' ममता के लिए आसान नहीं होगी चुनौती
ममता खुद को मुस्लिमों की सबसे बड़ी हिमायती बताती आई हैं। तृणमूल ने इस बार 47 मुस्लिम प्रत्याशी उतारे हैं, जो पिछली बार से पांच अधिक हैं। ममता मुस्लिम समुदाय को अपने साथ बनाए रखने को कोई कसर नहीं छोड़ रहीं। हालांकि, उनके लिए चुनौती आसान नहीं होने होगी।
दिनाजपुर में मुस्लिम आबादी 50 प्रतिशत से अधिक
कुल 294 विस सीटों में से 100-110 पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक हैं। राज्य की कुल आबादी वर्तमान में 10 करोड़ से अधिक है, जिनमें करीब 30 प्रतिशत मुस्लिम हैं। मुर्शिदाबाद, मालदा व उत्तर दिनाजपुर में मुस्लिम आबादी 50 प्रतिशत से अधिक है।



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