बहराइच: जिले के मिहीपूर्वा क्षेत्र के नैनिहा गांव में रहने वाले किसान रामप्रवेश मौर्य कृषि क्षेत्र में इतने अनुभवी हैं कि उन्होंने कई पुरस्कार अपने नाम किए हैं. उनकी काबिलियत को देखते हुए उन्हें बहराइच के नानपारा कृषि विज्ञान केंद्र में पौधों की नर्सरी के लिए नेट हाउस में जगह भी दी गई है. वे सहफसली खेती के बारे में किसानों को जानकारी देते हैं.
इस विधि से करें सहफसली खेती, होगी अच्छी कमाई!
सहफसली खेती तो बहुत से किसान करते हैं, लेकिन उन्हें सही तरीके की जानकारी नहीं होती. आधे-अधूरे तरीके से की गई सहफसली खेती सफल नहीं हो पाती, जिससे किसानों को अच्छा लाभ नहीं मिल पाता. ऐसे में अब किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है.
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सहफसली खेती में किसानों को गौ-आधारित खेती के साथ 4-5 जरूरी तकनीकों को अपनाना चाहिए. उदाहरण के तौर पर, सब्जियों की खेती में टमाटर के साथ कद्दू, बंद गोभी और शिमला मिर्च जैसी फसलें आसानी से उगाई जा सकती हैं. बस ध्यान रखें कि एक फसल मेड़ पर और दूसरी समतल भूमि पर लगाई जाए. इससे पौधे आपस में नहीं उलझते और उनकी वृद्धि बेहतर होती है.
जैविक खेती में मल्चिंग भी जरूरी
गौ-आधारित खेती के साथ-साथ किसानों को अपने खेत में मल्चिंग भी जरूर करनी चाहिए, चाहे वह जैविक (फल/फसल अवशेष) हो या पॉलिथीन मल्चिंग. इससे खरपतवार नहीं उगते और पौधों की वृद्धि तेजी से होती है. पौधे स्वस्थ रहते हैं और उनमें रोग लगने की संभावना भी कम हो जाती है.
इसके अलावा, कीट नियंत्रण के लिए स्टिकी ट्रैप, फेरोमोन ट्रैप और फ्रूट फ्लाई ट्रैप का उपयोग करना चाहिए. समय-समय पर नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और गोबर की खाद का प्रयोग भी जरूरी है.
इन तरीकों को अपनाकर किसान भाई सहफसली खेती को जैविक तरीके से सफल बना सकते हैं. किसी भी समस्या की स्थिति में किसान अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते हैं.



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