नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने अदालत के रिकॉर्ड में रेप पीड़िताओं की पहचान उजागर करने पर गंभीर चिंता जताई है। सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि इस पर लगी रोक का सख्ती से पालन करें।किशोरी से रेप के एक मामले में दोषी को बरी करने के फैसले को पलटते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यह निर्देश जारी किया।
किस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कही ये बात
इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 10 साल कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि, हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने यह कहते हुए उसे बरी कर दिया था कि पीड़िता का दो घंटे में 16 किमी यात्रा करना असंभव लगता है।
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अभियोजन पक्ष के मामले को खारिज नहीं किया जा सकता
इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटेश्वर सिंह की पीठ ने फैसले को रद्द करते हुए कहा कि भले ही समय-सीमा पर संदेह हो, घटना पर असर नहीं पड़ता। गवाहों के बयानों में छोटी-मोटी विसंगतियां होने के आधार पर पूरे अभियोजन पक्ष के मामले को खारिज नहीं किया जा सकता।
रेप पीड़िता की पहचान उजागर करने पर 2 साल की जेल



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