एकादशी के दिन क्या न करें? जानें खान-पान से जुड़े जरूरी नियम

एकादशी के दिन क्या न करें? जानें खान-पान से जुड़े जरूरी नियम

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यह भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन पूजा-पाठ और व्रत करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है। हालांकि एकादशी का व्रत जितना फलदायी है, इसके नियम उतने ही कठिन हैं। अक्सर साधक अनजाने में कुछ ऐसी चीजों का सेवन कर लेते हैं, जिससे उनका व्रत खंडित हो जाता है और उन्हें व्रत का पूरा फल नहीं मिलता है। आइए इस आर्टिकल में जानते हैं कि एकादशी व्रत के दौरान किन चीजों से बचना चाहिए?

एकादशी व्रत में न खाएं ये चीजें 

चावल

एकादशी के दिन चावल खाने की मनाही होती है। पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन चावल का सेवन करना 'महर्षि मेधा के मांस' के सेवन के समान माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से चावल में जल का अंश अधिक होता है और चंद्रमा का प्रभाव इस पर ज्यादा पड़ता है, जिससे मन चंचल होता है और व्यक्ति की एकाग्रता कम होती है।

दाल

केवल चावल ही नहीं, बल्कि एकादशी पर मसूर की दाल, चने की दाल और उड़द की दाल का सेवन भी नहीं करना चाहिए। इन्हें तामसिक माना गया है।

लहसुन और प्याज

किसी भी सात्विक व्रत की तरह एकादशी में भी लहसुन और प्याज का सेवन पूरी तरह वर्जित है। ये तामसिक भोजन की श्रेणी में आते हैं, जो शरीर में आलस्य और मन में अशुद्ध विचार पैदा करते हैं।

ये भी पढ़े :मुखिया के मुखारी - पैसा सबसे ज्यादा जरुरी है

सब्जियां

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन बैंगन, मूली और पत्तागोभी जैसी सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए। इन्हें अशुद्ध माना गया है, जो व्रत के दौरान आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए ठीक नहीं है।

नमक

इस पावन तिथि पर सामान्य सफेद नमक का उपयोग नहीं करना चाहिए। इसके स्थान पर केवल सेंधा नमक का ही प्रयोग करना चाहिए।

एकादशी व्रत के नियम 

  • एकादशी का व्रत केवल एक दिन का नहीं होता। इसके नियम दशमी तिथि की रात से ही शुरू हो जाते हैं। इसलिए दशमी की रात से तामसिक चीजों से दूरी बना लें।
  • इस दिन केवल खान-पान ही नहीं, बल्कि विचारों की पवित्रता भी जरूरी है। ऐसे में किसी की निंदा न करें, क्रोध से बचें और पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • भगवान विष्णु की पूजा तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है, लेकिन याद रखें कि एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। पूजा के लिए पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।
  • एकादशी का व्रत तभी पूर्ण माना जाता है, जब उसका पारण द्वादशी तिथि के शुभ मुहूर्त में किया जाए। ऐसे में पारण शुभ मुहूर्त के अनुसार ही करें।









You can share this post!


Click the button below to join us / हमसे जुड़ने के लिए नीचें दिए लिंक को क्लीक करे


Related News



Comments

  • No Comments...

Leave Comments